प्रतिभा पलायन भारत के समक्ष एक चुनौती, कैसे सुलझाएं इस समस्या को...पढ़ें ये पूरी खबर

Edited By rajesh kumar,Updated: 01 Aug, 2021 03:24 PM

brain drain a challenge before india

भारत की शिक्षा प्रणाली को काफी मजबूत माना जाता है और जो बेहद प्रतिभाशाली और बुद्धिमान युवा पैदा करता है। जिनकी मांग दुनिया के कोने-कोने में हैं। भारतीयों को बाहरी देशों में अच्छे स्तर के जीवन के साथ अच्छे पैकेज प्राप्त होते हैं और इस तरह वे अपने देश...

नई दिल्ली: भारत की शिक्षा प्रणाली को काफी मजबूत माना जाता है और जो बेहद प्रतिभाशाली और बुद्धिमान युवा पैदा करता है। जिनकी मांग दुनिया के कोने-कोने में हैं। भारतीयों को बाहरी देशों में अच्छे स्तर के जीवन के साथ अच्छे पैकेज प्राप्त होते हैं और इस तरह वे अपने देश को छोड़ देते हैं। भारतीय अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्टता और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में उच्च वेतन वाली नौकरियों को हासिल करके देश का नाम रोशन कर रहे हैं। वे व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट होने के लिए जाने जाते हैं और कई रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राज्य के प्रौद्योगिकी उद्योग का एक बड़ा हिस्सा भारतीय है।

इस प्रकार भारतीयों ने अमरीकी प्रौद्योगिकी के निर्माण के लिए प्रमुख रूप से योगदान दिया है और अर्थव्यवस्था को भी बदल कर रख दिया है। यदि उन्होंने भारत के विकास में इसका आधा भी योगदान दिया होता तो देश की वर्तमान स्थिति बेहतर होती। किंतु सवाल यह उठता है कि भारत में प्रतिभा पलायन की समस्या इतनी गंभीर क्यों है। हमें उन कारणों को समझना होगा और इस समस्या को सुलझाने के लिए कुछ मजबूत व गंभीर कदम उठाने होंगे।

विदेशों में पलायन के कारण
आरक्षण
प्रथा : भारत जैसे देशों में प्रतिभाशाली युवक कोटा प्रणाली से पीड़ित हैं। आरक्षित वर्ग के कई अयोग्य लोगों को उच्च वेतन वाली नौकरियां मिलती हैं जबकि योग्य उम्मीदवारों को कम वेतन वाली नौकरी से संतुष्ट होना पड़ता है। योग्य व्यक्तियों के लिए ऐसा स्वाभाविक है जो अलग देश में अपनी प्रतिभा के समान नौकरी तलाशने के लिए वहां स्थानांतरित हो जाते हैं।  सही समय है कि भारत सरकार को इस पक्षपाती कोटा प्रणाली को खत्म कर देना चाहिए। मेरिट एकमात्र फैसले का आधार बने।

कोटा प्रणाली के अलावा लोगों को उनके पंथ, जाति और अन्य चीजों के आधार पर भी प्राथमिकता दी जाती है जिनका नौकरी से कुछ लेना-देना नहीं है। बहुत से लोग अपने समुदाय या शहर से संबंधित लोगों को नौकरी देते हैं। यह सब बंद कर दिया जाना चाहिए और एक व्यक्ति को उसकी योग्यता और क्षमता के आधार पर नौकरी मिलनी चाहिए।

पक्षपाती व्यवहार: कई बॉस अपने कुछ कर्मचारियों को दूसरों के मुकाबले ज्यादा पसंद करते हैं। कई बार ऐसा देखा जाता है कि अगर कोई कर्मचारी कड़ी मेहनत कर रहा है और नौकरी अच्छे तरीके से कर रहा है तो भी उसे पदोन्नति देते वक़्त ध्यान में नहीं रखा जाता और जो बॉस का पसंदीदा है वह आसानी से पदोन्नत हो जाता है बेशक वह मापदंडों पर खरा नहीं उतरता हो। इससे कर्मचारियों के बीच असंतोष का कारण बनता है और वे बेहतर अवसरों की तलाश करते हैं।

नेतृत्व में कमी : ऐसा कहा जाता है कि कर्मचारी कंपनी नहीं छोड़ता बल्कि वह अपने बॉस को छोड़ता है। अच्छे बॉस और प्रबंधकों की कमी के कारण कंपनी को कई प्रतिभाशाली कर्मचारियों के जाने का नुकसान उठाना पड़ता है। लोगों को अपने काम के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और पुरस्कृत किया जाना चाहिए और यदि ऐसा सही समय पर नहीं होता है तो वे निराश हो जाते हैं और बाहर अवसरों की तलाश करते हैं।

वेतन पैकेज: वेतन पैकेजों का निर्णय लेने के लिए संगठन को निष्पक्ष होना चाहिए। एक ही स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों के वेतन पैकेज की बात करते समय ज्यादा बदलाव नहीं होने चाहिए। इसके अलावा वेतन पैकेज बाजार के मानकों के बराबर होना चाहिए नहीं तो कर्मचारी नौकरी छोड़ कर वहां चले जायेंगे जहाँ उन्हें योग्य पैकेज मिल जाएगा।

निष्कर्ष :भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के तरीकों का उद्देश्य प्रतिभा पलायन की समस्या को नियंत्रित करना है। लोगों को इस समस्या को नियंत्रित करने के तरीकों को गंभीरता से लेना चाहिए तथा सरकार और संगठनों द्वारा कार्यान्वित किया जाना चाहिए। युवाओं का विदेशों में पलायन रोकने के लिए देश प्रेम की भावना जागृत करनी चाहिए। उन्हें सम्मानजनक वेतन और तरक्की मिलनी चाहिए। देश में भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद को समाप्त करना चाहिए क्योंकि इससे प्रतिभाशाली युवाओं के साथ भेदभाव होता है। युवाओं को देश में बढ़ने का अवसर और अच्छा जीवन स्तर देकर उनका विदेशों की तरफ पलायन को रोका जा सकता है।

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