जेतली(वित्त मंत्री) द्वारा जी.एस.टी. में और बदलाव के संकेत

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Wednesday, November 15, 2017-1:51 AM

1 जुलाई, 2017 से देश में जी.एस.टी. लागू किया गया था और तभी से कांग्रेस सहित अनेक विपक्षी दलों द्वारा इसकी भारी आलोचना की जाती रही है। इसी को देखते हुए जी.एस.टी. की खामियों को दूर करने के लिए जी.एस.टी. कौंसिल की हर महीने बैठक हो रही है। इसी पृष्ठभूमि में आम लोगों और उद्योगपति एवं व्यापारी वर्ग में व्याप्त असंतोष और बेचैनी को देखते हुए 6 अक्तूबर और 30 अक्तूबर को जी.एस.टी. कौंसिल की बैठकों में टैक्स ढांचे में कुछ रियायतें दी गईं। 

यही नहीं, बाद में हिमाचल और गुजरात के चुनावों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिमाचल में 5 नवम्बर को कहा कि जी.एस.टी. कौंसिल की अगली बैठक में व्यापारियों की कठिनाइयां दूर की जाएंगी। इसी के अनुरूप जी.एस.टी. कौंसिल की गुवाहाटी में 9-10 नवम्बर की बैठक में आम आदमी के इस्तेमाल की कई वस्तुओं पर टैक्स दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई। फिटमैंट कमेटी ने 62 वस्तुओं को 28 प्रतिशत कर के दायरे में रखने की सिफारिश की थी लेकिन कौंसिल ने 12 और वस्तुओं को इसमें से हटा दिया। अब 28 प्रतिशत के सर्वाधिक टैक्स दर वाली मात्र 50 वस्तुएं रह गई हैं जबकि इससे पहले उनकी संख्या 227 थी। 

इस संबंध में 11 नवम्बर के संपादकीय ‘आम उपयोग वाली कई वस्तुओं पर जी.एस.टी. की दर घटाकर 18 प्रतिशत की गई’ में हमने लिखा था कि, ‘‘बेशक पार्टी वर्करों के रोष और आम लोगों तथा उद्योग जगत के मूक प्रोटैस्ट को भांपते हुए टैक्स स्लैब में कुछ छूट दी गई है परंतु इतना ही काफी नहीं है तथा इस संबंध में अभी और बहुत कुछ करना बाकी है।’’ उल्लेखनीय है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में जी.एस.टी. और नोटबंदी बड़ा मुद्दा रहे हैं और राहुल गांधी अपनी रैलियों में जी.एस.टी. के जटिल होने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा, ‘‘नोटबंदी और जी.एस.टी. का कठोर कदम 12 बजे रात लागू किया गया था और गब्बर सिंह भी आधी रात को ग्रामीणों पर हमला करता था।’’ 

टैक्स स्लैब में दी गई रियायतों को जहां विपक्ष ने चुनावों के मद्देनजर राजनीति प्रेरित बताया, वहीं वित्त मंत्री अरुण जेतली ने टैक्स की दर में कमी को गुजरात चुनाव से जोडऩे वालों की आलोचना करते हुए कहा कि ‘‘ये लोग बचकानी राजनीति कर रहे हैं तथा उक्त दरें आसान बनाने का काम 3-4 महीने से चल रहा था।’’ इसके साथ ही 13 नवम्बर को पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री जेतली ने कहा कि, ‘‘जी.एस.टी. दरों में कमी की गुंजाइश होने के कारण हमने पिछले चार महीनों में 28 प्रतिशत वाले स्लैब में बदलाव किए हैं।’’ उन्होंने जी.एस.टी. दरों में और फेरबदल का संकेत देते हुए कहा कि, ‘‘सरकार के राजस्व को देखते हुए ऐसा किया जाएगा।’’ 

इस बारे प्राप्त जानकारी के अनुसार अब अगले दौर में 5 प्रतिशत और 12 प्रतिशत वाले स्लैब पर फोकस किया जाएगा। इनमें से हर स्लैब में लगभग 250 वस्तुएं हैं। अरुण जेतली जोकि जी.एस.टी. कौंसिल के अध्यक्ष हैं, का कहना है कि कौंसिल चाहती है कि टैक्स कटौती के लाभ सीधे उपभोक्ता तक पहुंचें। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग जी.एस.टी. की एक दर की बात कह रहे हैं उन्हें टैरिफ स्ट्रक्चर की जानकारी नहीं है। इसलिए गेहूं, चावल, चीनी पर लग्जरी कार या तम्बाकू उत्पादों के बराबर टैक्स नहीं लगाया जा सकता। 

दूसरी ओर खाद्य वस्तुओं विशेषकर सब्जियों के भाव में तेजी के परिणामस्वरूप खुदरा-मुद्रास्फीति अक्तूबर में बढ़ कर 3.58 प्रतिशत पर पहुंच गई है जो 7 महीनों का उच्चतम स्तर है जबकि सितम्बर मास में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सी.पी.आई.) आधारित महंगाई दर 3.28 प्रतिशत थी। अत: जितनी जल्दी वे 5 और 12 प्रतिशत वाले स्लैब में बदलाव करके दरें घटाएंगे, आम लोगों के साथ-साथ उद्योग एवं व्यापार जगत के लिए उतना ही अच्छा होगा तथा सरकार की आलोचना में भी कमी आएगी।—विजय कुमार 

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