नोटबंदी के बाद बैंक में जमा हुए 15.39 करोड़, बेनामी घोषित

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Monday, November 27, 2017-10:38 AM

नई दिल्लीः दिल्ली के एक बैंक में नोटबंदी के बाद कैश जमा करवाए गए 15.39 करोड़ रुपए को बेनामी प्रॉपर्टी घोषित कर दिया गया। कैश जमा करवाने वाले और उसका लाभ लेने वाले दोनों की पहचान नहीं होने के बाद एक स्पैशल कोर्ट ने यह फैसला दिया। उल्लेखनीय है कि नए एंटी-ब्लैकमनी कानून के तहत दर्ज पहले मामले में यह फैसला आया है। यह मामला पुरानी दिल्ली के नया बाजार इलाके में रहने वाले रमेश चंद शर्मा से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अवैध संपत्ति पर लगाम लगाने के प्रयासों के तहत बेनामी लेन-देन निरोधक (संशोधन) कानून 2016 को पिछले साल एक नवम्बर को लागू किया।

सर्वे में आई.टी. डिपार्टमैंट को हुआ शक 
नोटबंदी के बाद ब्लैकमनी पर चलाए गए अपने अभियान के तहत इन्कम टैक्स (आई.टी.) डिपार्टमैंट ने पिछले साल दिसम्बर में के.जी. मार्ग पर कोटक महिंद्रा बैंक ब्रांच में सर्वे किया। उसे शक हुआ कि नोटबंदी के बाद शर्मा ने 3 कंपनियों के अकाऊंट में पुराने 500 और 1000 रुपए के नोट में 15.39 करोड़ कैश जमा करवाए। टैक्स अधिकारियों ने पाया कि कैश डिपॉजिट करने के बाद इसे खपाने के लिए गुमनाम लोगों के एक समूह को डिमांड ड्रॉफ्ट जारी किए गए। डिपार्टमैंट ने इन डी.डी. को फ्रीज कर इन्हें बेनामी फंड बताते हुए अटैच कर दिया।

बैंक में दिए पते पर नहीं मिला कैश जमा करवाने वाला 
नए कानून के तहत एक अथॉरिटी इन मामलों को देखती है। अथॉरिटी के चेयरपर्सन मुकेश कुमार और मैम्बर-कानून तुषार वी. शाह की डिवीजन बैंच ने अपने आदेश में कहा कि सर्वे, तलाशी व जांच में मिली जानकारी के अनुसार कोई संदेह नहीं है कि 15.39 करोड़ रुपए की यह रकम बेनामी प्रॉपर्टी है। इसमें पैसे जमा करवाने वाले रमेश चंद शर्मा और इससे लाभ लेने वालों की कोई पहचान नहीं हो पाई। शर्मा जांच में अथॉरिटी के सामने नहीं आए और किसी भी सम्मन का जवाब नहीं दिया।

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