पूंजी प्रवाह पर चिदंबरम ने बैंक प्रमुखों से किया विचार विमर्श

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Sunday, August 25, 2013-12:35 AM

मुंबई: वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने आज यहां बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। बंद कमरे में हुई इस बैठक में रुपये की विनिमय दर भारी उतार चढाव से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की गई। वित्तमंत्री ने बैठक के बाद वहां खड़े संवाददाताओं से कोई चर्चा नहीं की।

समझा जाता है कि बैठक में चालू खाते के घाटे के लिए पूंजी की व्यवस्था के उपायों पर भी चर्चा की गयी। चिदंबरम अपराह्न कुछ विदेशी संस्थागत निवेशकों से भी मुलाकात करेंगे। चालू खाते के घाटे (कैड) के लिए वित्त का प्रबंध करने में विदेशी संस्थागत निवेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैंकों के साथ बैठक में वित्तमंत्री के साथ आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम और वित्तीय सेवा सचिव राजीव टकरू भी शामिल हुए। बैठक में भारतीय स्टेट बैंक के प्रतीप चौधरी, आईसीआईसीआई बैंक की चंदा कोचर, एचडीएफसी बैंक के आदित्य पुरी, सिटी ग्रुप इंडिया के प्रमीत झावेरी, बैंक आफ इंडिया की विजय लक्ष्मी अय्यर, केनरा बैंक के आर के दुबे और स्टैंर्डर्ड चार्टर्ड इंडिया के अनुराग अदलखा और कुछ अन्य बैंकों के प्रमुख भी शामिल हुये।

बैठक के बाद आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख कोचर ने संवाददाताओं से कहा, बैठक मुख्य रूप से यह विचार विमर्श करने के लिए था कि पूंजी प्रवाह को लेकर क्या किया जा सकता है। बैठक बहुत अच्छी और सकारात्मक रही। भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन चौधरी से पत्रकारों ने जब पूछा कि क्या वित्त मंत्री ने कोई निर्देश दिया है, जो उन्होंने कहा, इसमें कोई निर्देश नहीं दिया गया। इसमें केवल विचार विमर्श किया गया।

बैंकों के साथ वित्तमंत्री की यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह ऐसे समय हुयी है, जबकि देश से विदेशी पूंजी के लगातार निकलने से रुपया दबाव में है और रिजर्व बैंक को पिछले सप्ताह भारतीय कंपनियों और व्यक्तियों पर पूंजी विदेश भेजने के मामले में कुछ अंकुश लगाना पड़ा।

रिजर्व बैंक के इस कदम से बाजार में विदेशी निवेशकों के बीच यह आशंका उत्पन्न हो गयी थी कि सरकार पूंजी नियंत्रण के उपाय लागू कर सकती है और देश फिर से 1991 के संकट से पहले के दौर में पहुंच सकता है, जब भुगतान संतुलन के कारण कड़े पूंजी नियंत्रण लागू किये गये थे।

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 22 मई को अमेरिकी केन्द्रीय बैंक फेडरल बैंक की आसान रिण नीति में बदलाव के संकेत के बात से भारतीय बाजार से अब तक 12 अरब डॉलर की पूंजी निकाल ली है। इसका रुपये की विनिमय दर पर बुरा असर पड़ा है। गुरूवार को कारोबार के दौरान रुपया गिरकर 65.56 प्रति डॉलर चला गया था।

भारतीय मुद्रा इस समय एशिया में सबसे बुरे दौर में गुजर रही है और अप्रैल से अब तक डॉलर के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत नीचे आ चुकी है। इसके लिए चालू खाते के घाटे को मुख्य रूप से जिममेदार माना जा रहा है। यह घाटा पिछले वित्तवर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के 4.8 प्रतिशत के बराबर था। चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में भी कैड उंचा रहने का अनुमान है। (एजेंसी)


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