गूगल के रोबोट ने जीती अनोखी प्रतियोगिता

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Saturday, December 28, 2013-5:28 PM

गूगल द्वारा खरीदी जापानी कंपनी के बनाए एक रोबोट ने अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की शोध इकाई डारपा की ओर से आयोजित प्रतियोगिता जीत ली है। दो दिन चली प्रतियोगिता में टीम शाफ्ट की मशीन ने बचाव से जुड़े आठों काम पूरे कर अपने प्रतिद्वंद्वियों को काफ़ी बड़े अंतर से हराया। टीम शाफ़्ट और शीर्ष की सात अन्य टीमें अब 2014 में होने वाली फ़ाइनल प्रतियोगिता के लिए डारपा के पास और फंड के लिए अर्ज़ी दे सकती हैं।

डारपा को प्रतियोगिता के लिए प्रेरणा फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र में हुए रिसाव से मिली डारपा का कहना था कि उसे ये चुनौती आयोजित करने की प्रेरणा तब मिली जब ये स्पष्ट हो गया कि साल 2011 में जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में हुए रिसाव से निपटने में रोबोट केवल सीमित भूमिका ही निभा पाए। डारपा रोबोटिक्स चैंलेंज के प्रोग्राम मैनेजर गिल प्रैट ने बताया, "(उस हादसे के बाद) हमें पता चला कि ये रोबोट देखने के अलावा कुछ और नहीं कर सकते। वहां ऐसे रोबोट की ज़रुरत थी जो परमाणु संयंत्र के अंदर जाकर वाल्व को बंद कर सके।"

डारपा ने प्रतियोगियों को आठ काम दिए और इन सभी के लिए 30-30 मिनट की समय सीमा थी। जो कि इस प्रकार हैं इनमें एक गाड़ी चलाना, आठ फ़ीट ऊंची सीढ़ी पर चढ़ना, दरवाज़े पर रखा मलबा हटाना, लीवर-चालित दरवाज़ा खोलना, दीवार में बिना तार वाली मशीन से त्रिकोणीय आकार काटना, तीन वाल्व बंद करना और एक पाइप को खोलकर उसके नोज़ल को दीवार में लगे कनेक्टर से जोड़ने जैसे काम शामिल थे।

शाफ़्ट कंपनी का रोबोट, दो पैरों वाला, चार फ़ीट 11 इंच लंबा रोबोट था। ये रोबोट एक ऐसी मोटर तकनीक का इस्तेमाल करता है जिसकी ऊर्जा बैटरी की जगह कैपेसिटर से आती है। रोबोट बनाने वाले इंजीनियरों का कहना है कि इस वजह से रोबोट के हाथ ज़्यादा तेज़ गति से चलते और घूमते हैं।

ये रोबोट टोकियो विश्वविद्यालय की जोउहोउ सिस्टम कोउगाकु शोधशाला से निकली एक टीम ने बनाया था और हाल ही में गूगल ने बताया कि उसने उस टीम को ख़रीद लिया है।


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