अदालत ने कच्चे तेल के निर्यात के अनुरोध वाली केयर्न इंडिया की याचिका खारिज की

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Tuesday, October 18, 2016-5:10 PM

नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय से केयर्न इंडिया लि. को झटका लगा है। अदालत ने ब्रिटेन के वेदांता समूह की कंपनी केयर्न इंडिया लि. की याचिका आज खारिज कर दी। याचिका में कंपनी ने अपने राजस्थान के बाड़मेर तेल फील्ड से अतिरिक्त कच्चे तेल के निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया था।   

अदालत ने इस आधार पर याचिका खारिज कर दी कि घरेलू कच्चा तेल का तबतक निर्यात नहीं किया जा सकता जब तक भारत इस मामले में ‘आत्मनिर्भर’ नहीं हो जाता। न्यायाधीश मनमोहन ने कहा कि इस मामले में एेसी कोई सूचना नहीं है कि भारत ने आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है, एेसे में केयर्न तेल फील्ड से उत्पादित अपने हिस्से का कच्चा तेल की मांग नहीं होने से सरकार से केवल मुआवजे का दावा कर सकती है।   

केयर्न तथा केंद्र के बीच उत्पादन साझेदारी अनुबंध (पीएससी) के तहत कंपनी को बाड़मेर से उत्पादित कच्चे तेल का 70 प्रतिशत मिलेगा जबकि शेष सरकार के पास जाएगा। केयर्न ने सुनवाई के दौरान कहा था कि कच्चे तेल की कंपनी की हिस्सेदारी सरकार या उसके द्वारा नामित ले सकती है और जिसका उठाव नहीं होता है, उसे निजी कंपनियों को बेचा जा सकता है या निर्यात किया जा सकता है। 

सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता तथा केंद्र के स्थायी वकील अनुराग अहलूवालिया ने केयर्न की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि एक अधिकार प्राप्त समिति ने निर्णय किया था कि घरेलू कच्चे तेल के निर्यात की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से नुकसानदायक होगा।  

अदालत ने सचिवों की अधिकार प्राप्त समिति के फैसले पर सहमति जताई और केयर्न को उसके हिस्से के कच्चे तेल के निर्यात की मंजूरी देने से मना कर दिया। अदालत ने कहा कि समिति ने जो कारण दिये, वे वैध और प्रासंगिक हैं। अदालत ने अपने फैसले में कहा, ‘‘वास्तव में तेल निर्यात पर अंकुश लगाने वाली नीति को लेकर केंद्र सरकार के सभी विभागों में सहमति है और यह देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है।’’ अधिकार प्राप्त समिति ने केयर्न को उसके हिस्से के कच्चे तेल के निर्यात के अनुरोध को खारिज कर दिया था। समिति का कहना था कि जबतक भारत आत्मनिर्भर नहीं होता, घरेलू कच्चे तेल का निर्यात नहीं किया जा सकता क्योंकि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं और पीएससी के उपबंधों का भी उल्लंघन करता है।


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