बिट क्वायन से प्रॉपर्टी की खरीद

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Saturday, December 02, 2017-9:45 AM

जालंधरः वर्तमान में बिट क्वायन तथा अन्य क्रिप्टो करंसियां काफी चर्चा में हैं। अक्सर इनकी चर्चा गलत कारणों से होती है परंतु, बिट क्वायन को बहुत-से लोग अच्छा मान रहे हैं। वर्तमान में रियल एस्टेट को भी इस विवाद में घसीट लिया गया है क्योंकि अमेरिका तथा दुबई में कुछ प्रोजैक्टों में निवेश को बिट क्वायन के माध्यम से आमंत्रित किया जा रहा है। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक भारतीय क्रिप्टो करंसी लांच करने की धारणा पर विचार कर रही है परंतु स्पष्ट तौर पर उसे ऐसा करने में कोई लाभ नहीं दिखाई दे रहा। वर्तमान में चल रही खरीदारी में मंदी से इस बात की संभावना बनती है कि क्या भारत में भी खरीदारों को बिट क्वायन जैसे विकल्प मिल सकेंगे? आइए एक नजर डालते हैं इस परिदृश्य पर।

चुनौतियां
ऐसी करंसी के कोई स्पष्ट लाभ नहीं हैं, परंतु इसके चलन से रियल एस्टेट को बहुत बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। यदि हम मान भी लें कि भारतीय रियल एस्टेट में बिट क्वायन से लेन-देन शुरू हो जाता है तो क्या यह किसी भी तरीके से रियल एस्टेट सैक्टर को महत्वपूर्ण ढंग से प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए रियल एस्टेट में ब्याज की दर इसका सकारात्मक या नकारात्मक रूप से प्रभाव पड़ेगा? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें पहले इस बात पर विचार करना होगा कि रियल एस्टेट का मूल्य साइज, लोकेशन तथा स्थानीय बाजार की दरों जैसे कारकों द्वारा निर्धारित होता है जो भारत में रुपयों में ही लिए-दिए जाते हैं।
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स्रोत
यदि किसी स्तर पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया लीगल टैंडर या रियल एस्टेट ट्रांजैक्शन के तौर पर बिट क्वायन को स्वीकार कर लेता है तो इससे प्रॉपर्टी का मूल्य इस करंसी में रुपए के हिसाब से ही होगा। एक बात याद रखें कि ऐसा तभी होगा यदि आर.बी.आई. इन फंडों के स्रोत तैयार करने पर पूरी तरह संतुष्ट दिखाई दे। इस बात को भी ध्यान में रखना होगा कि बिट क्वायन पैसे के आदान-प्रदान का इतना लोकप्रिय साधन बन चुका है कि इससे अपराध से जुड़ी ट्रांजक्शंस भी हो सकती हैं क्योंकि व्यक्ति के ट्रांजैक्शन के स्रोत का तब तक पता नहीं लगाया जा सकता है जब तक कि वह खुद ऐसा करने की सहमति न दे।

सुरक्षा
बिट क्वायन से संपत्ति की बिक्री तथा खरीदारी के मामले में निवेश की सुरक्षा का भी सवाल है। यह एक ऐसा सवाल है जिसके चलते बेनामी संपत्ति कानून एक बार फिर केंद्र में आ गया है। वर्तमान में एक ऐसी करंसी के माध्यम से जिसे भारत में एक लीगल टैंडर के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाता, उससे विक्रेता तथा खरीदार दोनों को खतरा है। निवेशक तथा विक्रेता चाहता है कि उसकी संपत्ति हर तरीके से कानूनी हो ताकि स्वामित्व तथा संपत्ति की पुन: बिक्री में कोई समस्या न आए। बिट क्वायन के विरुद्ध यह सर्वाधिक ताकतवर तर्क है।

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