जेपी ग्रुप के कारण यस बैंक और इंडसइंड बैंक को 350 करोड़ रुपए की चपत

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Thursday, April 20, 2017-2:14 PM

मुंबईः जेपी ग्रुप की वजह से यस बैंक और इंडसइंड बैंक का प्रॉफिट 350 करोड़ रुपए घट गया। आर.बी.आई. के अंतिम समय में आए सर्कुलर के चलते इन बैंकों को ग्रुप में एक्सपोजर पर मोटी रकम की प्रोविजनिंग करनी पड़ी। आर.बी.आई. ने बैंकों से यह खुलासा करने के लिए कहा था कि कहीं बैड लोन पर उसके और बैंकों के अनुमान में कोई बड़ा फर्क तो नहीं। सूत्रों के मुताबिक इसमें बड़ा फर्क होने की सूरत में बैंकों को ज्यादा प्रोविजनिंग करनी पड़ी। यस बैंक को जेपी ग्रुप को दिए लोन पर 227.9 करोड़ रुपए की प्रोविजनिंग करते हुए उसको बैड लोन घोषित करना पड़ा जबकि इंडसइंड को 122 करोड़ की प्रोविजनिंग करनी पड़ी।

पिछले साल जुलाई में अल्ट्राटेक सीमेंट ने कहा था कि वह 16,189 करोड़ रुपए से जेपी ग्रुप का टोटल 1.72 करोड़ टन सालाना कपैसिटी वाला सीमेंट बिजनस खरीदेगी। इस डील के जल्द अंजाम पर पहुंचने की उम्मीद है। यस बैंक के एमडी और सीईओ राना कपूर ने कहा, 'यह सीमेंट कंपनी नॉर्थ की है और हमारी जानकारी के हिसाब से मुंबई के एक दिग्गज कॉर्पोरेट हाउस ने कुछ सीमेंट बिजनस की खरीदारी के लिए पक्का अग्रीमेंट किया हुआ है।'

कपूर ने कहा कि ग्रॉस एनपीए में बढ़ौतरी की वजह एक सिंगल बॉरोअर है। इसको हमने अपने टोटल लोन की लगभग 0.69% रकम दी हुई है। हमने सिंगल बॉरोअर को 911.5 करोड़ रुपए का लोन दिया हुआ है जिसकी रिकवरी जल्दी ही होनेवाली है। हमारे पास जो डॉक्युमेंट्स हैं उनके हिसाब से रिकवरी की विजिबिलिटी बहुत ज्यादा है।

इंडसइंड बैंक के एमडी और चीफ एग्जिक्युटिव रोमेश सोबती ने कहा कि मार्च तिमाही में सिंगल सीमेंट बिजनस लोन पर 122 करोड़ रुपए का प्रोविजन करना पड़ा है। सोबती ने यह भी कहा कि सीमेंट कंपनी में एक्सपोजर स्टैंडर्ड और परफॉर्मिंग है लेकिन रिजर्व बैंक ने हमसे ज्यादा प्रोविजनिंग करने के लिए कहा क्योंकि कंपनी के पेरेंट पर दबाव दिख रहा है और उसको सब स्टैंडर्ड करार दिया गया है। सोबती ने कहा कि डील पूरी होने के बाद प्रोविजन को नियर टर्म में राइट बैक कर दिया जाएगा।
 

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