वर्तमान समय की परिस्थितियों में मानवी व्यक्तित्व को श्रेष्ठ कैसे बनाया जाए ?

  • वर्तमान समय की परिस्थितियों में मानवी व्यक्तित्व को श्रेष्ठ कैसे बनाया जाए ?
You Are HereDharm
Thursday, September 05, 2013-10:34 AM

वर्तमान समय में श्रेष्ठ व्यक्तित्व संपन्न व्यक्तित्यों का अभाव है। बहुलता गए-गुजरों की है। विचार करने पर एक ही रास्ता दिखाई देता है,'उपासना का अवलंबन'

उपासना से जुड़ी आदर्शवादी मान्यताएं एवं प्रेरणाएं ही चिंतन को श्रेष्ठ एवं व्यक्तित्व को उत्कृष्ट बना सकने में समर्थ हो सकती हैं। उपासना की समग्रता एवं उसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों को भली-भांती समझा जा सके तो व्यक्तित्व निर्माण का सबल आधार मिल सकता है।

उपासना का लक्ष्य है - व्यक्तित्व का परिष्कार इसके निर्धारण से उससे जुड़े आदर्शों एवं उच्चस्तरीय सिद्धांतों द्वारा उपासक को श्रेष्ठ मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उपास्य में तन्मय होने का अभिप्राय है उच्चस्तरीय आदर्शों एवं सिद्धांतों में लीन हो जाना और उनके अनुरूप आचरण करना। उपासना द्वारा निर्माण की यह मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया चलती रहती है। उपासक के विचारों का परिशोधन परिष्कृतीकरण होता जाता है, भाव-संवेदनाओं में आदर्शवादिता जुडऩे लगती है।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You