पितृपक्ष के दौरान जमीन संबंधी कोई भी डील अशुभ होगी

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Saturday, September 28, 2013-12:12 PM

19 सितम्बर से 4 अक्तूबर तक जारी श्राद्ध या पितृपक्ष के दौरान सम्पत्ति के किसी भी तरह के लेन-देन के लिए अशुभ माना जाता है। यह वह समय है जब लोगों को अपने पूर्वजों की पूजा करनी होती है। इन दिनों देश के अधिकतर हिस्सों में सम्पत्ति के लेन-देन में सर्वाधिक कमी दर्ज की जाती है और ऐसा हर साल होता है। कारण है कि इन दिनों श्राद्ध चल रह रहे हैं और अधिकतर लोगों का मानना है कि इस दौरान सम्पत्ति का लेन-देन शुभ नहीं होता है।

श्राद्ध 19 सितम्बर से शुरू हुए हैं जो 16 दिनों तक जारी रहेंगे
दरअसल हिन्दू धर्म को मानने वाले श्राद्धों के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा करते हैं। इस दौरान लोग किसी भी तरह के शुभ कार्य करने जैसे नई चीजें खरीदने से परहेज करना पसंद करते हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र में कार्य करने वाले लोग भी इस अवधि के दौरान एक तरह से छुट्टियों पर चले जाते हैं क्योंकि सम्पत्तियों के लेन-देन में भारी कमी हो जाती है।

इस क्षेत्र के जानकार भी कहते हैं कि अधिकतर लोग श्राद्ध के दौरान न तो सम्पत्ति खरीदते हैं तथा न अपनी सम्पत्ति बेचते हैं। सम्भावित खरीददार तो इस दौरान सम्पत्तियों की खरीदारी के बारे में बातचीत तक करना मुनासिब नहीं समझते हैं। अधिकतर लोगों का विचार यही होता है कि इस दौरान जमीन संबंधी कोई भी डील अशुभ होगी, खासकर कोई भी नई चीज खरीदना सही नहीं समझा जाता है चाहे यह जमीन हो या मकान।

‘पितृ’ का अर्थ पूर्वजों से है तथा 16 दिन के पितृपक्ष के दौरान हिन्दू अपने पूर्वजों के लिए पूजा करते हैं तथा जरूरतमंदों को धन दान करते हैं। वे दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ब्राह्मणों को भोजन भी करवाते हैं। माना जाता है कि इसके बदले में पूर्वज श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को आशीर्वाद देते हैं कि जीवन में उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण हों।

‘श्राद्ध’ शब्द ‘श्रद्धा’ से लिया गया है जिसका अर्थ आस्था एवं ईमानदारी होता है। पितृपक्ष हिन्दू मास भाद्रपद की पूर्णिमा को शुरू होता है तथा आश्विन मास की अमावस्या को समाप्त हो जाता है। माना जाता है कि  इस पखवाड़े के दौरान पूर्वजों की आत्माएं अपने-अपने घरों को लौटती हैं। लोगों का विश्वास है कि इस दौरान उनकी पूजा तथा उनके नाम पर दिया गया दान उनकी आत्माओं को शांति प्रदान करता है।
 
दिल्ली के एक प्रसिद्ध ज्योतिषी के अनुसार यह समय पूजा करने के लिए है और लोग इस दौरान किसी तरह की नई चीज नहीं लाते हैं, खासकर  सम्पत्ति। पितृपक्ष सम्पत्ति के लेन-देन के लिए सही नहीं है क्योंकि भूमिकारक ग्रह बुध बेहद कमजोर होता है। इसे शुभ नहीं माना जाता। साथ ही बुध ग्रह शनि ग्रह की प्रतीक्षा कर रहा है जो सम्पत्तियों के लेन-देन के लिए हानिकारक होता है।

हालांकि इस संबंध में भी विचार अलग हैं। एक अन्य प्रसिद्ध ज्योतिषी के अनुसार पितृपक्ष को आमतौर पर सम्पत्तियों के लेन-देन के लिए अशुभ नहीं माना जा सकता है। किसी भी व्यक्ति के लिए शुभ या अच्छा समय  उसकी जन्म कुंडली पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति का अच्छा समय चल रहा है तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि पितृपक्ष है या नहीं।  वैसे तर्क कोई भी दिया जाए यही आम राय है कि यह समय पूजा-पाठ तथा परोपकारी कार्यों के लिए होता है। सभी तरह के समारोह तथा नई खरीदारी को पितृपक्ष की समाप्ति के साथ ही शुरू होने वाले नवरात्रों तक टालना ही बेहतर समझा जाता है।

 


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