सफलता, धन, यश व स्वास्थ्य देंगे सूर्य पूजा के ये उपाय

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Sunday, December 22, 2013-11:11 AM

भारत में सूर्योपासना ऋग वैदिक काल से होती आ रही है। सूर्य और इसकी उपासना की चर्चा विष्णु पुराण, भगवत पुराण, ब्रह्मा वैवर्त पुराण आदि में विस्तार से की गई है। सूर्य को प्रत्यक्ष देवता कहा जाता है क्योंकि उन्हें मूर्त रूप में देखा जा सकता है अर्थात हर कोई इनके साक्षात दर्शन कर सकता है। सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।

रविवार सूर्य भगवा्न की पूजा का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य की उपासना का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य पूजा, सूर्य स्त्रोत का पाठ, सूर्य मंत्र का जप करने से मनोरथ सिद्ध होते हैं। सूर्य नमस्कार करने से मान-सम्मान, धन-यश तथा उत्तम स्वास्थ्य मिलता है। सभी ग्रहों में सूर्य नारायण सबसे तेजस्वी और कांतिमय हैं। अतएवं सूर्य आराधना से शरीर भी सुंदर और कांतिमय होता है।

ध्यान रहे सूर्य भगवान की आराधना का सबसे उत्तम समय सुबह का होता है। सूर्य की कोई भी पूजा- आराधना उगते हुए सूर्य के समय में बहुत लाभदायक सिद्ध होती है।

सूर्य मंत्र - ऊँ सूर्याय नमः

तंत्रोक्त मंत्र - ऊँ ह्यं ह्रीं ह्रौ सः सूर्याय नमः । ऊँ जुं सः सूर्याय नमः ।

जीवन में सुख-समृद्धि धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए निम्न मंत्र का उच्चारण करें:

'उदसौ सूर्यो अगादुदिदं मामकं वच:। यथाहं शत्रुहोऽसान्यसपत्न: सपत्नहा।। सपत्नक्षयणो वृषाभिराष्ट्रो विष सहि:। यथाहभेषां वीराणां विराजानि जनस्य च।।'

भावार्थ: सूर्य ऊपर चला गया है, मेरा यह मंत्र भी ऊपर गया है, ताकि मैं शत्रु को मारने वाला बन जाऊं। प्रतिद्वन्द्वी को नष्ट करने वाला, प्रजाओं की इच्छा को पूरा करने वाला, राष्ट्र को सामर्थ्य से प्राप्त करने वाला तथा जीतने वाला बन जाऊं, ताकि मैं शत्रु पक्ष के वीरों का तथा अपने एवं पराए लोगों का शासक बन सकूं।

पौराणिक काल में सूर्य को आरोग्य देवता भी माना जाने लगा था। सूर्य की किरणों में कई रोगों को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है। ह्रदय रोगियों के लिए भी सूर्य की उपासना करने से आशातीत लाभ होता है। उन्हें आदित्य ह्रदय स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए। इससे सूर्य भगवान प्रसन्न होते हैं और दीर्घायु होने का फल प्रदान करते हैं।

मनोवांछित फल पाने के लिए निम्न मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

सूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए तांबे के पात्र में पुष्प रखकर उन्हें जल चढ़ाएं।

सूर्य भगवान की कृपा पाने के लिए प्रत्येक रविवार गुड़ और चावल को नदी अथवा बहते पानी में प्रवाहित करें।

तांबे का सिक्का नदी में प्रवाहित करने से भी सूर्य भगवान की कृपा रहती है।


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