इस स्थान पर द्रौपदी ने की थी छठ पूजा, यहां आज भी लगती है भक्तों की भीड़

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You Are HereDharmik Sthal
Monday, November 07, 2016-9:22 AM

उत्तर भारत में छठ पूजा का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन रांची में इस पर्व का विशेष महत्व है। यहां के नगड़ी गांव के लोग नदी या तालाब में अर्घ्य नहीं देते अपितु एक सोते के पास छठ पूजा होती है। माना जाता है कि इस सोते पर द्रौपदी सूर्य उपासना करके सूर्यदेव को अर्घ्य देती थी। यह भी माना जाता है कि वनवास के दौरान पांडव झारखंड के इस गांव में काफी दिनों तक ठहरे थे। 

 

कहा जाता है कि जब पांड़वों को प्यास लगी तो उन्हें कहीं भी पानी न मिला। तब द्रौपदी के कहने पर अर्जुन ने जमीन पर तीर मार कर पानी निकाला था। यह भी माना जाता है कि इस सोते के पास ही द्रौपदी सूर्य को अर्घ्य दिया करती थी। सूर्यदेव की उपासना करने से पांडवों पर सदैव सूर्यदेव का आशीर्वाद था। इसी मान्यता के कारण यहां आज भी छठ पूजा धूमधाम से मनाई जाती है। 

 

यहां से कुछ दूरी पर हरही गांव है। माना जाता है कि यहां पर भीम का ससुराल था। भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच के पुत्र का जन्म भी यहीं पर हुआ था। एक अन्य मान्यता के अनुसार महाभारत में वर्णित एकचक्रा नगरी नाम ही अपभ्रंश होकर अब नगड़ी हो गया है।


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