मेघों की झंकार, कर्क संक्रांति से प्रारंभ होगा शिव प्रिय सावन का त्योहार

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Saturday, July 15, 2017-9:34 AM

सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश 'संक्रांति' कहलाता है। ज्योतिष के मुहूर्त खंड व सनातन धर्मग्रंथ सिंधु सरिता और ज्योतिष के सूर्य सिद्धान्त के आधार अनुसार सूर्य के 'उत्तरायण' होने को 'मकर संक्रांति' अर्थात जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तथा 'दक्षिणायन' होने को 'कर्क संक्रांति' कहते हैं अर्थात जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करते हैं। श्रावण माह अर्थात सावन से पौष मास तक सूर्य का उत्तरी छोर से दक्षिणी छोर तक जाना दक्षिणायन कहलता है। सूर्य सिद्धांतानुसार कर्क संक्रांति से में दिन छोटे व रातें लंबी होती चली जाती हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार उत्तरायण पक्ष देवताओं हेतु दिन व दक्षिणायन पक्ष देवताओं हेतु रात्रि होती है। वैदिक काल से ही उत्तरायण को 'देवयान' व दक्षिणायन के "पितृयान" कहा जाता है।


सौरमास का आरम्भ सूर्य संक्रांति से होता है व एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के समय को सौरमास कहते है। इस आधार पर वर्ष में 12 सौरमास होते है। संक्रांति से सौरमास का नया महीना ‍शुरू होता है। सौर-वर्ष के 2 भाग हैं। पहला 6 माह का उत्तरायण व दूसरा भी 6 मास का दक्षिणायण। चंद्रमा की कला की घट-बढ़ वाले दो पक्ष (कृष्ण व शुक्ल) का जो एक मास होता है वह चंद्रमास है। शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर अमावस्या को पूर्ण होने वाले माह को 'अमांत' कहते हैं। कृष्‍ण प्रतिपदा से 'पूर्णिमात' पूरा होने वाला गौण चंद्रमास है। चंद्र-वर्ष सौर-वर्ष से 11 दिन 3 घटी 48 पल छोटा है। सौरमास 365 दिन का व चंद्रमास 355 दिन का होने से प्रतिवर्ष 10 दिन का अंतर आता है। इसी कारण अनेक पर्व संक्रांति आधारित मनाए जाते हैं। 


मेघों की झंकार के साथ 16 जुलाई को कर्क संक्रांति से प्रारंभ होगा शिव प्रिय सावन का त्योहार।


आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal
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