शनि प्रदोष: शनिदेव को कंट्रोल करती है ये शक्ति, सूर्यास्त के बाद करें ये उपाय

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Friday, November 25, 2016-3:32 PM

कल 26 नवंबर शनिवार को शनि का दिन और भगवान शिव की तिथि है। जब ये दो दिनों का संयोग बनता है तो इसे शनि प्रदोष कहा जाता है। भगवान शिव शनिदेव के गुरू हैं। वह उनके परम भक्त और चेले भी हैं। भगवान शंकर ने ही उन्हें संसार का न्यायाधिश होने का कार्य दिया है परंतु न्याय करते समय शनि देव व्यक्ति के कर्म अनुसार उससे अत्यधिक पीड़ित कर देते हैं। शनिदेव पर नियंत्रण रखने के लिए भगवान शंकर द्वारा शनि देव को समय-समय पर हनुमान जी द्वारा पीड़ित करवाया गया। 


* ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें, शिवलिंग पर पंचामृत अर्पित करें। 108 बार ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।


* शाम को पीपल पर सरसों के तेल का दीपक अर्पित करें, ॐ शं शनिश्चराय नम: मंत्र का जाप करें।


* सूर्यास्त के बाद किसी गरीब को भोजन करवाएं अथवा अपनी क्षमता के अनुसार खाने-पीने का सामान दान करें।


* जरूरतमंदो को जूता, छाता, काले तिल, काले उड़द का दान करें। 


* शनि प्रदोष पर शाम को पीपल का पौधा लगाएं और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी लें। ये पौधा कहीं भी लगा सकते हैं, घर में नहीं लगाएं।


* शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में शाम के वक्त लोहे का छल्ला पहनें।


* पीपल के पास बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।


* शनिवार को सारा दिन मन में ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः मंत्र का जाप करें।


* साढ़ेसाती चल रही है या ढैय्या तो हर रोज सुबह या शाम शनि चालीसा का पाठ करें या शनि मंत्र का प्रतिदिन जाप करें। हर रोज संभव न हो तो शनिवार अथवा शनि प्रदोष के दिन ये उपाय अवश्य करें।

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