तैरने से होता है महिलाओं का "कौमार्यभंग"

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Friday, November 29, 2013-3:32 PM

काहिरा: मुस्लिम बहुल देशों में आपको अजीबो-गरीब फतवे सुनने को मिल सकते हैं।  काहिरा की विश्वविधालय अल अजहर की कमेटी ने ऎसे ही फतवों के अध्ययन की एक रिपोर्ट पेश की है। मिस्त्र में मुस्लिम ब्रदरहुड और सलाफी समूह ने इस रिपोर्ट के अध्ययन द्वारा महिलाओं के लिए जारी फतवों के बारे में बताया गया है। जिसमें दिखाया गया है कि महिलाओं को किस नजरिए से देखा जाता है।

कमेटी की इस रिपोर्ट को एक अखबार में प्रकाशित किया गया है। दोनों समूहों द्वारा जारी किए गए 51 फतवों का अध्ययन राष्ट्रपति मोर्सी के समय में किया गया है। कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, इन फतवों में महिलाओं को एक अजीब प्राणी समझा गया है और इनकी नजर में महिलाओं को सेक्स के लिए ही बनाया गया है। यह लोग महिलाओं की आवाज, उनके चेहरा दिखाने, घर की दीवार से बाहर उनकी मौजूदगी को अपराध मानते हैं  और कुछ लोग इन्हें बहुत बड़ा गुनाह मानते है।

एक फतवा में यह कहा गया था कि महिलाओं के पानी में तैरने से उनका कौमार्यभंग हो जाता है। कुछ फतवों में महिलाओं को कुछ सब्जिया और फल खाने के लिए मना करते हैं। एक महिलाओं के केले और चुकंदर को छूने के लिए मना किया है। इसके पीछे कारण यह है कि इनको देखकर महिलाएं उत्तेजित होकर गलत रास्ते पर जा सकती हैं। फतवे में यह भी कहा गया है कि पति के घर म होने पर महिला को बंद रखना चाहिए अगर पड़ोसी को पता लग जाए कि महिला घर में अकेली है तो वह अवसर पा कर गल्त कांम कर सकता है।

एक अन्य फतवे के अनुसार, लड़कियों के गलत रास्ते पर जाने से पहले ही लड़कियों की दस साल की आयु में शादी कर देनी चाहिए। लड़कियों के घर से 25 किलोमिटर दूर स्कूल जाने पर रोक लगाई गई है। ऎसा ही एक अजीबो-गरीब फतवें में कहा गया था कि अगर कोई जोड़ा बिना कपड़ों के सेक्स करता है तो उनकी शादी रद्द कर दी जानी चाहिए। मोर्सी के कार्यकाल के समय ऎसे और कई अजीबो-गरीब फतवे जारी किए गए थे।


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