भारत सहित सात देशों पर अब भी है प्रथम विश्वयुद्ध का साया

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Tuesday, February 11, 2014-2:58 PM

लंदन: भारत, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, रूस, तुर्की तथा मिस्र के कई लोगों का मानना है कि प्रथम विश्व युद्ध का साया उन पर अब भी मौजूद है। भारत, रूस और फ्रांस के कई लोगों का कहना है कि उस युद्ध में ब्रिटेन का प्रभाव सकारात्मक था जबकि तुर्की तथा मिस्र के युवाओं का कहना है कि ब्रिटेन का युद्ध के नकारात्मक प्रभाव रहा है।

यह खुलासा ब्रिटिश कांउसिल के जान वार्नो के एक सर्वेक्षण से हुआ है। सर्वेक्षण में ब्रिटेन के एक हजार लोगों में से 50 फीसदी लोगों ने कहा कि अमेरिकी तथा पश्चिम एशिया ने युद्ध में हिस्सा लिया जबकि 25 फीसदी से कम लोगों ने कहा कि अफ्रीका तथा एशियाई देश भी इस युद्ध में शामिल हुए थे।

सात देशों में हुए सर्वेक्षण में शामिल 72 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनका देश उस युद्ध की वजह से अब भी प्रभावित है। ब्रिटेन के 62 फीसदी लोगों ने इस युद्ध का संबंध जर्मन और नाजी से बताया है। भारत में 45 फीसदी लोगों ने कहा कि इस युद्ध में ब्रिटेन का सकारात्मक प्रभाव रहा है जबकि रूस तथा फ्रांस में हुए सर्वेक्षण में 18 फीसदी लोगों ने भी यही बात कही है जबकि तुर्की के 34 प्रतिशत और मिस्र के 22 फीसदी लोगों ने कहा कि ब्रिटेन का इसमें नकारात्मक प्रभाव रहा है।

यह रिपोर्ट आज प्रकाशित हुई है। सर्वेक्षण में कुल सात हजार 488 लोग शामिल हुए है। सर्वेक्षण में एक हजार 52 लोग मिस्र से एक हजार 29 लोग फ्रांस, एक हजार 70 लोग जर्मन, 1215 लोग भारत, एक हजार 19 लोग रूस, एक हजार 22 लोग तुर्की तथा एक हजार 81 लोग ब्रिटेन के शामिल हुए हैं। आश्चर्य यह है कि सर्वेक्षण में शामिल आधा लोगों को मालूम ही नहीं है कि अमेरिका पूरे युद्ध में शामिल हुआ था या नहीं।

 


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