सैन्य अदालत में होनी चाहिए मुशर्रफ मामले की सुनवाई: रांझा

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Tuesday, February 11, 2014-7:03 PM

इस्लामाबाद: परवेज मुशर्रफ के वकील ने आज देशद्रोह के एक मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत से कहा कि पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक के मामले की सुनवाई सैन्य अदालत में होनी चाहिए। मुशर्रफ के वकील खालिद रांझा ने विशेष अदालत से कहा कि इस मामले की सुनवाई एक सैन्य अदालत में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुशर्रफ जैसा व्यक्ति जो सेना अधिनियम के क्षेत्राधिकार में आता है, उसके मामले की सुनवाई किसी अन्य अदालत में नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि सेना अधिनियम, 1952 और संविधान के अनुच्छेद 245 में देशद्रोह से जुड़े प्रावधान शामिल हैं और सेना अधिनियम उन क्षेत्रों के नागरिकों पर भी लागू होता है, जहां असैन्य प्रशासन की मदद के लिए सेना को बुलाया गया हो। पिछले साल सरकार ने मुशर्रफ के वर्ष 2007 में आपातकाल लगाने से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत गठित की थी। रांझा ने दलील दी कि विशेष अदालत वर्तमान या सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी के मामले की सुनवाई नहीं कर सकती। कानून के तहत यह अनिवार्य है कि कोई अपराध करने पर सैन्यकर्मी सेना अधिनियम के तहत कोर्ट मार्शल का सामना करे।

हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि मुशर्रफ के खिलाफ सेना अधिनियम के तहत सुनवाई नहीं हो सकती क्योंकि इसमें देशद्रोह का प्रावधान शामिल नहीं है। दो जनवरी को हृदय संबंधी विकारों के कारण रावलपिंडी के सैन्य अस्पताल में भर्ती हुए मुशर्रफ विशेष अदालत की सुनवाई में शामिल नहीं हुए। इस मामले में आगे की सुनवाई कल होगी। अदालत ने मुशर्रफ को 18 फरवरी को उसके सामने बुलाया है।


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