मोदी-ट्रंप का संकल्पः दोनों देशों के पास हो दुनिया की सबसे ताकतवर सेना

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Tuesday, November 14, 2017-12:45 AM

वॉशिंगटनः 'दुनिया के दो महान लोकतंत्रों के पास दुनिया की सबसे शानदार सेनाएं भी होनी चाहिए।' भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच सोमवार को हुई मुलाकात के बाद दोनों देशों ने यह संकल्प लिया। फिलीपींस के मनीला में दोनों नेताओं की मुलाकात आसियान सम्मेलन से इतर हुई। 

'एशिया-प्रशांत' की जगह 'हिंद-प्रशांत' शब्द का उपयोग
अमरीका की सत्ता पर काबिज प्रशासन (डेमोक्रैटिक और रिपब्लिकन) ने ग्लोबल शक्ति के रूप में भारत के उभार का समर्थन किया है लेकिन इसके पहले कभी भी इतने साफ तौर पर सैन्य सहयोग को लेकर बातें नहीं कही जाती थीं। हालांकि ट्रंप अमरीका के मित्र देशों और सहयोगियों को सैन्य सामग्री बेचने के हमेशा से इच्छुक रहे हैं लेकिन जिस तरह ट्रंप प्रशासन लगातार 'एशिया-प्रशांत' की जगह 'हिंद-प्रशांत' शब्द का इस्तेमाल कर रहा है, उससे यह साफ लग रहा है कि वह भू-रणनीतिक वजहों से चीन के मुकाबले भारत की सैन्य क्षमता को बढ़ाने में मदद करना चाहता है। 

दो महान लोकतंत्रों के पास शानदार सेनाएं होनी चाहिए 
वाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'दोनों नेताओं ने भारत और अमरीका के बीच रणनीतिक सहयोग पर विस्तार से बात की और मुक्त व खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर अपनी प्रतिबद्धता साझा की। उन्होंने बड़े रक्षा सहयोगियों के तौर पर अपना सहयोग बढ़ाने का यह कहते हुए संकल्प लिया कि दुनिया के दो महान लोकतंत्रों के पास दुनिया की सबसे शानदार सेनाएं भी होनी चाहिए।' इसका सीधा मतलब यह है कि भारत का रुख भी इससे अलग नहीं है। 

ट्रंप ने कहा इकनॉमिक गेम चेंजर होगा साबित
अमरीका के बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात की तारीफ की कि हाल के महीनों में भारत ने अमरीका से 10 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल खरीदा है। ट्रंप ने उम्मीद जाहिर की है कि मजबूत ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के लिए इकनॉमिक गेम चेंजर साबित होगा। भारत ने हाल ही में आधी दुनिया दूर अमरीका से तेल खरीदना शुरू किया है। जबकि पारंपरिक रूप से भारत अब तक खाड़ी क्षेत्र से ही तेल का आयात करता आया है। इस कदम ने ना सिर्फ वॉशिंगटन और अमरीका सांसदों को खुश कर दिया है बल्कि एक क्षेत्र पर  भारत की निर्भरता भी कम हुई है। 

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