देर बाद ही सही राहुल गांधी का कांग्रेस अध्यक्ष बनना हुआ तय

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Tuesday, December 05, 2017-3:33 AM

स्वतंत्रता के बाद देश पर सबसे लम्बी अवधि तक कांग्रेस का ही शासन रहा। पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के अलावा गुलजारी लाल नंदा, लाल बहादुर शास्त्री तथा नरसिम्हा राव व मनमोहन सिंह भी प्रधानमंत्री रहे। यही नहीं चंद्रशेखर, देवेगौड़ा व इंद्र गुजराल की सरकारों को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त होने के कारण उनकी सरकारों की चाबी भी क्रियात्मक रूप से कांग्रेस के हाथ ही रही। 

132 वर्ष पुरानी कांग्रेस पार्टी पर भी अधिकांश समय तक नेहरू-गांधी परिवार का ही कब्जा रहा है। पं. नेहरू, इंदिरा व राजीव के बाद अब 19 वर्षों से सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष हैं। वह प्रधानमंत्री बनने की इच्छुक थीं पर इसका विरोध होने के कारण मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनाए गए। मोती लाल नेहरू से लेकर नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी के सदस्य राहुल गांधी 2004 में राजनीति में प्रवेश कर अमेठी से सांसद तथा 2007 में पार्टी के महासचिव बने और अंतत: 19 जनवरी, 2013 को जयपुर में कांग्रेस उपाध्यक्ष के रूप में उनका अभिषेक करके उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी में नम्बर 2 पर आसीन कर दिया गया। 

सोनिया के स्वास्थ्य को देखते हुए इसके जल्दी ही बाद राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपने की मांग कांग्रेस में एक वर्ग द्वारा शुरू कर दी गई थी जिसे देखते हुए 13 अक्तूबर, 2017 को सोनिया गांधी ने भी संकेत दिया था कि कांग्रेस की कमान जल्दी ही राहुल के हाथों में होगी। कई प्रदेश इकाइयां राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के बारे में प्रस्ताव पहले ही पारित कर चुकी थीं। 13 अक्तूबर को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा औपचारिक तौर पर राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने संबंधी प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री कै. अमरेंद्र सिंह ने कहा था कि राहुल को अब पार्टी की कमान सौंप देनी चाहिए और 2019 के चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए राहुल पूरी तरह सक्षम हैं। 

उन्होंने यहां तक कहा कि अमरीका में विश्वविद्यालय के छात्रों से रू-ब-रू होते समय राहुल गांधी में नेतृत्व के वे गुण दिखाई दिए जिनकी विश्व भर में सराहना हुई थी। युवक कांग्रेस ने भी 14 अक्तूबर को ही राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया। राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने की उठ रही मांग को देखते हुए पार्टी के निर्वाचन अधिकारी और सांसद एम. राम चंद्रन ने 16 अक्तूबर को कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से उनके आवास पर भेंट करके पार्टी संगठन के चुनाव तथा अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए तारीख तय करने के लिए श्रीमती गांधी से चर्चा की। 

इसके बाद 20 नवम्बर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने कांग्रेस के अगले अध्यक्ष के चुनाव कार्यक्रम पर मोहर लगा दी जिसके अनुसार नामांकन की अंतिम तारीख 4 दिसम्बर को राहुल गांधी ने अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए और कोई अन्य नामांकन पत्र दाखिल न होने के बाद उनका निर्विरोध कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना तय हो गया। जहां तक राहुल गांधी को अध्यक्ष पद पर आसीन करने का संबंध है इसे आनन-फानन में सम्पन्न नहीं किया गया है बल्कि इसके लिए चार मास पूर्व से ही तैयारी हो रही थी। अब उनकी टीम भी पहले से बेहतर हो गई है और उनके भाषण देने की शैली में भी परिपक्वता आ गई है। 2013 में राहुल गांधी ने कहा था, ‘‘सत्ता जहर है लेकिन मैं इसे लेने के लिए तैयार हूं।’’ और अब 4 साल देर से ही सही लेकिन राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी लेने जा रहे हैं। 

कांग्रेस में आने जा रहे इस बदलाव को लेकर पार्टी में उत्साह है लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह नरेंद्र मोदी के जनसंपर्क कौशल का मुकाबला कर पाएंगे। भारतवर्ष को इस समय मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है जहां कांग्रेस और भाजपा का मजबूत होना जरूरी है वहीं विपक्ष का संगठित होना भी उतना ही आवश्यक है। इससे देश में लोकतंत्र मजबूत होगा और देश का भला होगा।—विजय कुमार   

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