बाबरी मस्जिद मामले में आडवाणी के खिलाफ होगी सुनवाई

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Tuesday, October 22, 2013-10:22 AM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के मामले में भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी और 19 अन्य आरोपियों के खिलाफ साजिश का आरोप हटाने के फैसले के खिलाफ केन्द्रीय जांच ब्यूरो की अपील पर 12 दिसंबर को सुनवाई की जाएगी। न्यायमूर्ति एच एल दत्तू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले में 12 दिसंबर को ‘पूरी सुनवाई’ करेगी।

न्यायालय ने तीन सितंबर को सीबीआई के अनुरोध पर इस मामले की सुनवाई दो महीने पहले करने का निश्चय किया था। शुरू में इस प्रकरण की सुनवाई दिसंबर में होनी थी। आडवाणी के वकील ने इसका विरोध नहीं किया था।

सीबीआई ने इस अपील में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 21 मई, 2010 के निर्णय को चुनौती दी है। उच्च  न्यायालय ने विवादित ढांचा गिराने के मामले में आडवाणी और 19 अन्य के खिलाफ साजिश का आरोप हटाने के सीबीआई की विशेष अदालत के निर्णय को सही ठहराया था।

उच्च न्यायालय ने सीबीआई को राय बरेली की विशेष अदालत में आडवाणी और अन्य के खिलाफ दूसरे आरोपों में आगे कार्यवाही की अनुमति प्रदान कर दी थी ,जिसके अधिकार क्षेत्र में यह मामला आता है।

विशेष अदालत ने आडवाणी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, मुरली मनोहर जोशी, सतीश प्रधान, सी आर बंसल, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, साध्वी रितंबरा, विष्णु हरि डालमिया, महंत अवैद्यनाथ, आरवी वेदांती, परम हंस राम चंद्र दास, जगदीश मुनि महाराज, बैकुण्ठ लाल शर्मा, नृत्य गोपाल दास, धरमदास, सतीश नागर और मोरेश्व सावे के खिलाफ साजिश का आरोप हटा दिया था। शिव सेना सुप्रीमो बाल ठाकरे का निधन हो जाने के कारण आरोपियों की सूची से उनका नाम हटा दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले अपील दायर करने में अत्यधिक विलंब के लिए केन्द्रीय जांच ब्यूरो को आड़े हाथ लिया था। उच्च न्यायालय ने मई, 2010 के आदेश में कहा था कि विशेष अदालत के चार मई, 2001 के निर्णय के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका में कोई दम नहीं है।

इस प्रकरण में दो मामले हैं। पहला मामला 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के वक्त राम कथा कुंज के मंच पर मौजूद आडवणी और अन्य लोगों से संबंधित है जबकि दूसरा मामला उन लाखों अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ है जो विवादित ढांचे में और उसके आसपास थे।

सीबीआई ने आडवाणी और 20 अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (विभिन्न वर्गो में कटुता पैदा करने), धारा 153-बी (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक दावे करना) धारा 505 (मिथ्य प्रचार करना और अफवाह फैलाने) के आरोप में मामले दर्ज किए थे।  

जांच ब्यूरो ने बाद में इन सभी के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाते हुए धारा 120-बी भी लगाई थी जिसे विशेष दालत ने निरस्त कर दिया था और उच्च न्यायालय ने इस निर्णय को सही ठहराया था।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि जांच ब्यूरो ने राय बरेली में मुकदमे की सुनवाई के दौरान या फिर पुनरीक्षण याचिका में कभी भी यह नहीं कहा कि इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप है।


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