पत्नी को कोर्ट में घसीटना पड़ा महंगा

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Wednesday, November 06, 2013-4:01 PM

नई दिल्ली : एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी व नाबालिग बच्चे को गरीबी में जीवन जीने लिए छोड़ दिया और जब उन्होंने उससे गुजारा भत्ता मांगा तो बेतुके कारण देकर उसे भत्ता देने से बचने की कोशिश की।

इसे गंभीरता से लेते हुए दिल्ली की एक अदालत ने इस पति पर 25 हजार रुपए जुर्माना लगा दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.के.गाबा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपीलकर्ता ने अपनी पत्नी एवं नाबालिग बच्चे को गरीबी का जीवन जीने के लिए छोड़ दिया।

अदालत ने यह आदेश सुरेश(बदला हुआ नाम)की अपील पर दिया है। उसने दंडाधिकारी कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। दंडाधिकारी कोर्ट ने उसे आदेश दिया था कि वह अपनी पत्नी व बच्चे को एक-एक हजार रुपए गुजारे भत्ते के तौर पर दें। सुरेश का कहना था कि पैथेलाजिकल डाइगनोस्टिक लैब कारोबार से उसे महज 15 हजार रुपए प्रति माह की आय हो रही है। इतना ही नहीं उसकी 80 वर्षीय मां की जिम्मेदारी भी उस पर है। ऐसे में वह कैसे अपनी पत्नी व बच्चे के लिए गुजारा भत्ता दे सकता है।

अदालत ने कहा कि तमाम तथ्यों को देखने के बाद पाया गया है कि उसने अपनी आय को छुपाने की हर संभव कोशिश की है। उसने अपनी आयकर रिटर्न भी अदालत में पेश नहीं किए। इतना ही नहीं उसकी मां को करीब 20 हजार रुपए प्रति माह की स्वतंत्रता सेनानी पेंशन मिल रही है। ऐसे में वह अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देने के योग्य है।
 

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