पहली बार विधानसभा में आदिवासी महिला भीकनगांव की आवाज बुलंद करेगी

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Sunday, November 10, 2013-3:54 PM

बड़वाह: खरगौन जिले में अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित भीकनगांव विधानसभा क्षेत्र में आजादी के बाद सन 1952 से 2008 के बीच अब तक हुए 13 विधानसभा चुनावों में आज तक कोई महिला प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाई। भीकनगांव विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से प्रदेश में 25 नवंबर को होने वाले चुनाव में इस बार संयोगवश दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस ने महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।

उल्लेखनीय है कि भाजपा ने अपनी स्थापना से लेकर साल 2008 के चुनाव तक भीखनगांव से कभी भी किसी महिला को अपना प्रत्याशी नहीं बनाया। अब उसने पार्टी की जिला उपाध्यक्ष एवं जनपद सदस्य नंदा ब्रम्हणे के रूप में पहली बार किसी महिला पर भरोसा जताया है। वहीं, कांग्रेस ने नंदा के खिलाफ खरगौन जिला अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य झूमा सोलंकी को मैदान में उतारा है। वह राज्य महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं।

कांग्रेस ने साल 2008 के पिछले विधानसभा चुनाव में संगीता सिलदार पटेल को यहां से टिकट जरूर दिया था, लेकिन वह चुनाव हार गई थीं तथा इसी चुनाव में उमा भारती की भाजश से प्रत्याशी तुलसी गोले भी पराजित हो चुकी हैं। वर्ष 1980 में जनता पार्टी (सेक्युलर) की पुनीबाई वर्ष 2003 में निर्दलीय लक्ष्मी रोमड़े भी इस सीट से पराजित हो गई थीं।

इस बार पहली बार इस आदिवासी विधानसभा क्षेत्र से दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस एवं भाजपा ने आदिवासी महिला उम्मीदवारों को मौका दिया है। भीखनगांव सीट का अब तक का इतिहास बताता है कि यहां दोनों प्रमुख दलों भाजपा अथवा कांग्रेस का ही प्रत्याशी चुनाव जीतता आया है। यदि इस बार भी ऐसा ही हुआ, तो एक शिक्षित और स्वावलंबी आदिवासी महिला नेता को क्षेत्र का प्रतिनिधित्व मिलना तय है।

 


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