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कांग्रेस का किला बनी रोहताश नगर सीट

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Monday, December 02, 2013-4:12 PM

नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी): दिल्ली के पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा का गढ़ रही रोहताश नगर सीट पर अब समीकरण बहुत बदल गया है। दूसरे चुनाव में भाजपा को जानबूझकर मात्र 150 वोटों से हरवाने का खेल एेसा चला कि यह सीट कांग्रेस का किला बन गई।

दिग्गज कांग्रेसी रामबाबू शर्मा ने 2 बार और तीसरी बार उनके बेटे विपिन ने यह सीट जीती। इस बार विपिन के लिए सहानुभूति लहर नहीं है। वह फिर भी पिता व अपने काम के नाम पर वोट मांग रहे हैं, वहीं भाजपा के जितेन्द्र महाजन मंहगाई और कांग्रेस की नाकामी को मुद्दा बना रहे हैं।

इस सीट पर लगभग 5 प्रतिशत जाट व दस प्रतिशत मुस्लिम मतदाता मुजफ्फरनगर कांड से प्रभावित हो सकते हैं। यह सीट गाजियाबाद व लोनी की सीमा से सटी हुई है। जाट भाजपा के पक्ष में जा सकते हैं तो मुस्लिम वोटों के लिए तीन तो मुस्लिम प्रत्याशी ही मैदान में हैं। बसपा व आप पार्टी इस बार अपनी कोई खास मौजूदगी दर्ज नहीं कर पा रही है। गत निगम चुनाव में भाजपा ने 4 में 3 सीटें जीती थीं।

वर्ष 1993 में भाजपा के अलोक कुमार ने लगभग 7,000 वोटों से यह सीटी जीती थी। दूसरी बार 1998 में गुटबाजी के शिकार होकर वह राधेश्याम खन्ना से मात्र 150 वोटों से हार गए। तीसरी बार 2003 में कांग्रेस के राम बाबू शर्मा ने लगभग 7000 वोटों से उन्हें फिर हराया। चौथी बार 2008 में राम बाबू ने 12000 के करीब वोटों से जीत दर्ज की। उनकी अचानक हुई मौत के कारण 2009 में हुए उप चुनाव में उनके बेटे विपिन ने लगभग 24000 वोटों से जीत पाई।

इलाके के लोगों का कहना है कि अपनी बीमारी के कारण विपिन कम समय दे पाए लेकिन फिर भी उन्होंने बहुत काम किया है। लोग उनके पिता के कामों को आज भी नहीं भूल पाए हैं। इसका फायदा तो उन्हें मिलेगा ही। भाजपा ने अपना यह गढ़ पाने के लिए मंहगाई सहित तमाम मुद्दों को उठा रखा है। भाजपा उम्मीदवार जितेन्द्र महाजन कहते हैं, ‘मैं तो इसी इलाके का हूं। कोई बाहर से नहीं आया हूं। वह कांग्रेस प्रत्याशी को बाहरी साबित करने में जुटे हुए हैं।’

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