भारत-चीन सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश जारी : मेनन

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Saturday, December 21, 2013-9:13 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने शनिवार को कहा कि भारत ने चीन के साथ सीमा मुद्दे के समाधान के लिए तंत्र स्थापित किए हैं और इसे हल करने की कोशिशें जारी हैं। नेहरू मेमोरियल लाइब्रेरी और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च द्वारा ‘भारत-चीन संबंध : डेंग-राजीव वार्ता के 25 साल बाद’ विषय पर आयोजित चर्चा सत्र में मेनन ने कहा, ‘‘हमने सीमा पर शांति के लिए तंत्र स्थापित किए हैं। सीमा मुद्दे के हल के लिए हम कई उपायों पर चर्चा कर रहे हैं।’’

मेनन ने 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चीन यात्रा को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा, ‘‘यह साहसभरा और यथार्थवादी फैसला था, जिसने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को गति प्रदान की।’’ पूर्व राजदूत रोनेन सेन ने कहा कि राजीव गांधी बीजिंग जाने के लिए प्रतिबद्ध थे, जबकि कांग्रेस के भीतर से ही उनके दौरे को लेकर विरोध हो रहा था। उन्होंने कहा, ‘‘उस वक्त लोकसभा में कांग्रेस के करीब 400 सांसद थे, इस तरह विपक्ष का विरोध मामूली था लेकिन इस यात्रा को लेकर कांग्रेस के भीतर से ही विरोध था।’’

सेन ने कहा कि राजीव गांधी का बीजिंग दौरा जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं था, बल्कि इसके लिए पूरी तैयारी की गई थी। यहां तक अनाधिकारिक रूप से चर्चाएं की गई थीं। चर्चा सत्र की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा, ‘‘इस दौरे के पीछे गैरसमानांतर तैयारी की गई थी। यह दौरा दीर्घकालीन नीति का परिणाम था।’’

रमेश ने कहा कि चीन को लेकर भारत की विदेश नीति में एक राजनीतिक निरंतरता थी। यही वजह है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राजग सरकार ने 1998-2004 में इस नीति को आगे बढ़ाया। मेनन ने कहा, ‘‘हमने निर्णय किया कि भारत और चीन के बीच सीमा मुद्दा और द्विपक्षीय संबंध को पृथक रखा जाए। उसके बाद सभी सरकारों ने इस नीति पर संबंध बनाए।’’


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