सिपाही सुभाष तोमर का मामला अब तक अधर में

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Tuesday, December 31, 2013-2:09 PM

नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी): दिल्ली की नई सरकार ने सिपाही विनोद के परिजनों को एक करोड़ के मुआवजे का ऐलान किया है। ऐसे में सिपाही सुभाष तोमर  के मुआवजे की याद आना लाजिमी है। निर्भया आंदोलन के दौरान मौत का शिकार हुए सुभाष के परिवारवालों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है।

तब आरोप लगा था कि उसकी प्रदर्शनकारियों ने हत्या कर दी। तत्कालीन पुलिस आयुक्त ने उसके परिजनों को दिल्ली पुलिस की तरफ से एक दिन की सैलरी देने की घोषणा भी की। लेकिन वह घोषणा आयुक्त की विदाई के साथ ही हवा में उड़ गई। पूरी दिल्ली पुलिस की एक दिन की सैलरी एक करोड़ से भी ज्यादा बैठ रही थी। फिर इसमें पुलिस ने पेंच फंसा दिया कि सिर्फ राजपत्रित अधिकारी ही एक दिन की सैलरी देंगे। इस कारण सुभाष के परिजनों को उतनी रकम नहीं मिल पाई, जितनी की घोषणा करके उस वक्त आयुक्त ने वाहवाही लूटी थी।

सिपाही सुभाष तोमर की 24 दिसम्बर को इंडिया गेट जनता के प्रदर्शन के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने आनन-फानन में हत्या का मुकदमा दर्ज कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। इस हत्या को दिखाकर पुलिस ने एक तरह से जन आंदोलन को कुचलने की कोशिश भी की थी। आयुक्त नीरज कुमार तो सिपाही की अर्थी को कंधा देने तक पहुंचे थे। इस हत्या को कुछ चश्मदीद गवाहों ने गलत बताया था। इस पर बड़ा बवाल हुआ। शमशानघाट में आयुक्त ने कहा था कि दिल्ली पुलिस की एक दिन की सैलरी उसके परिवार को दी जाएगी।

लेकिन जब इसका आकलन किया गया तो यह बहुत बड़ी रकम हो रही थी। इसी कारण इसमें राजपत्रित अधिकारियों वाला पेंच फंसा दिया गया। दिल्ली पुलिस के सिपाहियों का कहना है कि ज्यादातर घोषणाएं तो केवल वाहवाही लूटने के लिए होती है। सुभाष के परिजनों के साथ जो हुआ वही कहीं विनोद के परिजनों के साथ भी न हो। अगर अरविंद केजरीवाल की सरकार न चल पाई तो यह घोषणा भी केवल कागजों में ही रह जाएगी। अगर घोषणा के साथ ही परिजनों को रकम का चेक दिया जाता तो सच्ची सहानुभूति होती।


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