सैनिकों की वापसी पर फैसले के लिए किसी जनमतसंग्रह की जरूरत नहीं : उमर

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Monday, January 06, 2014-8:26 PM

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज स्पष्ट किया कि सुरक्षाबलों की संख्या में कटौती तथा चरणबद्ध वापसी के लिए कोई जनमत संग्रह नहीं बल्कि एक ‘‘साहसी राजनेता’’ की आवश्यकता है।  उनकी टिप्पणी आम आदमी पार्टी नेता प्रशांत भूषण के उस बयान के परोक्ष संदर्भ में है जिसमें उन्होंने कश्मीर के लोगों के बीच यह जनमत संग्रह कराने की बात की थी कि क्या वे आंतरिक सुरक्षा से निपटने के लिए सेना चाहते हैं।

 उमर ने माइक्रो..ब्लागिंग साइट ट्विटर पर लिखा है कि सुरक्षाबलों में कटौती और अफ्सपा को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए किसी जनमतसंग्रह की नही बल्कि फैसला करने के लिए एक साहसी राजनेता की जरूरत है।  उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारों का चुनाव सिर्फ शासन करने और फैसले लेने के लिए होता है।
 
उमर ने कहा, ‘‘ सरकारों को जनादेश शासन करने और फैसले लेने के लिए मिलते हैं, उन्हें हर मुश्किल फैसला लेने से पहले जनमतसंग्रह कराने की आवश्यकता नहीं है। नेताओं को नेतृत्व करना चाहिए।’’
 
उमर अब्दुल्ला नीत सरकार के कल पांच साल पूरा हो गए। उनकी सरकार सुरक्षा बलों की संख्या में कटौती के मुद्दे को जोरशोर से उठाती रही है और इस अवधि में कश्मीर घाटी से 52 बंकर हटाए गए थे। उमर सरकार सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) को चरणबद्ध तरीके से हटाने पर जोर देती रही है और इस संबंध में राज्य के लोगों के लिए पहले करने की खातिर केंद्र से कई बार अपील भी की है।
 
 उन्होंने इस कानून को चरणबद्ध तरीके से हटाने की शुरूआत के लिए चार जिलों (दो कश्मीर में और दो जम्मू में) का सुझाव दिया था। इस कानून में सेना को तलाशी, बरामदगी और गिरफ्तार के संबंध में विशेष अधिकार प्राप्त हैं।
 

 


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