सोशल मीडिया में केजरीवाल पर हमले

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Tuesday, January 07, 2014-6:01 PM

नई दिल्ली (हर्ष कुमार सिंह): आम आदमी पार्टी की सरकार के सत्तारूढ़ होने के साथ ही सोशल मीडिया पर युद्ध काफी तीव्र हो रहा है तो कभी भद्दा हो चला है। सार्वजनिक रूप से भाजपा ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार बनने के साथ ही आप पर अपने हमले अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से तेज कर दिए हैं।

इसमें कांग्रेस भी कूद पड़ी है लेकिन चूंकि अभी कांग्रेस का दिल्ली की सरकार को समर्थन है तो कांग्रेस बनाम आप की लड़ाई उतनी मुखर नहीं नजर आ रही है। केजरीवाल के नाम से एक फर्जी ट्वीट पूरी कहानी कह  देता है। इस ट्विटर हैंडल से कहा गया है कि- ...(गाली) ने ट्वीट कर-कर घर छीन लिया...तुम संघियों के मेरी खुशी रास नहीं आती, देख लूंगा तुम्हें।

अरविंद केजरीवाल के बड़े सरकारी बंगले का मुद्दा अंग्रेजी के एक अखबार ने उठाया तो इसे सबसे पहले भाजपा ने लपका और विधानसभा में जोर-शोर से उठाया। इसके लिए भाजपा के इंटरनेट पर सक्रिय विंग ने भी अपना काम जोरदार तरीके से किया। हजारों की संख्या में फेसबुक और ट्विटर पर घोस्ट आई.डी. बना दी गई हैं जो सिर्फ ये ही काम कर रही हैं कि कैसे आप को घेरा जाए।

अगर हैशटैग अरविंद केजरीवाल के नाम से ट्विटर पर चल रहे ट्रेंडस पर आप गौर करें तो तमाम ऐसे ट्वीट पड़े मिल जाएंगे जो आप और केजरीवाल पर हमलावर नजर आएंगे। इनमें से कुछ केजरीवाल को झूठा, धोखेबाज और न जाने क्या-क्या कहते मिल जाएंगे। कुछ मुद्दों को लेकर आप की ओर से निर्णय लेने में हो रही देरी पर भी भाजपा का ये विंग खासा हमला कर रहा है। यहां तक की अरविंद केजरीवाल एंड पार्टी की कामयाबी की सराहना करने वालों को पेड मीडिया की श्रेणी में रखा जा रहा है।

ट्विटर पर केजरीवाल को सलाह दी जा रही है कि अगर आप कार्रवाई नहीं कर सकते तो मनमोहन सिंह मत बनो और इस्तीफा दे दो। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जिस दिन ट्विटर पर हैशटैग आप, हैशटैग अरविंद केजरीवाल या हैशटैग योगेंद्र यादव ट्रेंड न कर रहे हों। प्रति मिनट 70 से 80 ट्वीट्स आ रहे हैं। ट्विटर पर एक हैंडल तो थूक कर चाटो-आप, के नाम से बना दिया गया है।

दिन भर इस हैंडल से तमाम ऐसे ट्वीट आ रहे हैं तो आम आदमी पार्टी पर हमला कर रहे हैं। इस हैंडल के ट्वीट्स पर गौर करें तो इसका एकमात्र उद्देश्य ये ही नजर आता है कि कैसे ये साबित किया जाए कि आप सरकार वायदों को पूरा करने में किस तरह से विफल साबित हो रही है। द घंटा टाइम्स, नाम का एक हैंडल तो प्रशांत भूषण की तुलना दिग्विजय सिंह से कर रहा है। यहां आप और कांग्रेस को  एक साथ निशाना बना दिया जा रहा है। योगेंद्र यादव को तो सोशल मीडिया पर आलोकनाथ आफ पॉलिटिक्स कहा जा रहा है।


 


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