इतिहास की सबसे बड़ी हड़ताल 17-18 जनवरी को

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Friday, January 10, 2014-12:59 AM

नई दिल्ली : केंद्र सरकार और रेल यात्रियों को जनवरी माह में काफी परेशानी उठानी पड़ सकती है। नैशनल फैडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे मैन (एन.एफ.आई.आर.) 17-18 जनवरी को देशभर के 16 रेलवे जोन में गुप्त मतदान के जरिए भारतीय रेल का चक्का जाम करने के संबंध में फैसला लेगी।

अगर मतदान हड़ताल के पक्ष में हुआ तो यह भारतीय रेल के पिछले 40 साल के इतिहास और विश्व की सबसे बड़ी हड़ताल साबित होगी। राजधानी के पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर वीरवार को उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (यू.आर.एम.यू.) और एन.एफ.आई. की आम सभा में इसकी घोषणा की गई।

 सभा में भारी संख्या में रेलकर्मियों ने भाग लिया। साथ ही अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इस दौरान एन.एफ.आई.आर. के संयुक्त महामंत्री बी.सी.शर्मा ने कहा कि सरकार कोई भी रही लेकिन किसी ने कभी भी रेलवे कर्मचारियों की वेतन, भत्तों, पैंशन और अन्य सुविधाओं संबंधी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया।

रेलवे जैसी सुरक्षित और सस्ती यात्रा की सुविधा और किसी परिवहन सेवा में नहीं है, फिर भी इतनी बड़ी रेल सेवा को चलाने वाले लाखों कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह बेबस हैं।  रेलवे संगठनों ने पी.एम., रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और वित्तमंत्री को कई बार पत्र लिखकर अपनी मांगें उठाईं, लेकिन आज तक किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

हाल में विशाखापट्टनम में सम्पन्न हुए एन.एफ.आई.आर. के 2 दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में रेलवे कर्मचारियों की 65 सूत्रीय मांगों के मामले पर चर्चा हुई। चर्चा में यह साफ हो गया कि सरकार रेलकर्मियों को लगातार बेवकूफ बनाती रही है।

लिहाजा अब उन्हें देशव्यापी हड़ताल जैसा सख्त कदम उठाना पड़ेगा। इसके लिए 17-18 जनवरी को देशभर में लाखों कर्मचारी गुप्त मतदान करेंगे, जिसके बाद हड़ताल की जाएगी।


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