रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने खटखटाया अदालत का दरवाजा

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Sunday, January 19, 2014-7:06 PM

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि वह रेलवे क्रॉसिंग पर रिलायंस जियो इन्फोकॉम द्वारा ऑप्टिक फाइबर केबल्स बिछाने संबंधी मुद्दे को हल करने की पहल कर रहा है और इसके लिए उसे कुछ समय चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमन की अगुवाई वाली एक पीठ को केंद्र ने सूचित किया है कि यह मामला चूंकि दूरसंचार मंत्रालय और रेल मंत्रालय से जुड़ा है इसलिए इसके समाधान के लिए 15 दिन के समय की जरूरत है। केंद्र ने पीठ को यह भी बताया कि इस मुद्दे का हलकरने के लिए वह पहल कर रहा है।

मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को तय की गई है। रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने केंद्र, रेल मंत्रालय और दूरसंचार मंत्रालय के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया और रेलवे की मांगों को चुनौती दी। रेलवे ने केंद्र से लाइसेंस प्राप्त लाइसेंसी के तौर पर अपने दूरसंचार नेटवर्क के लिए अनुमति मांगी थी।

रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने रेलवे अधिकारियों द्वारा जारी किए गए कुछ परिपत्रों को भी चुनौती दी है। इन परिपत्रों में रेलवे नेटवर्कों में ऑप्टिक फाइबर केबल बिछाने की अनुमति के लिए कुछ अधिभार लगाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि रेल मंत्रालय को ऐसी अनुमति देने से मना नहीं किया जा सकता क्योंकि कंपनी के पास भारतीय टेलीग्राफ कानून के प्रावधानों के मुताबिक ऑप्टिक फाइबर बिछाने का वैधानिक अधिकार है। इसी के तहत उसे दूरसंचार सेवा मुहैया कराने के लिए लाइसेंस मिला।

इसमें रेल मंत्रालय की मांग को भी चुनौती दी गई है। रेल मंत्रालय ने फाइबर बिछाने के लिए अनुमति देने की खातिर अधिभार लगाने की मांग की है। याचिका में तर्क दिया गया है कि अधिभार की मांग पक्षपातपूर्ण और एकतरफा है। याचिका में भारतीय टेलीग्राफ कानून के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है।
 


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