विदेशी राजदूत के खिलाफ केस नहीं

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Thursday, January 23, 2014-6:03 PM

 नई दिल्ली : लिथुआनिया के राजदूत के खिलाफ दिल्ली की अदालत में मुकदमा चलाए जाने का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष कहा है कि किसी विदेशी राजनयिक या राजदूत के खिलाफ केस नहीं चलाया जा सकता है। 

केंद्र सरकार ने यह बातें न्यायालय के समक्ष दायर कर याचिका पर अपना जवाब दायर करते हुए कहीं है। इस याचिका में लिथुआनिया के राजदूत के खिलाफ मुकद्मा चलाए जाने की मांग की है। यह मामला राजदूत से करीब 50 लाख रुपए के किराए की अदायगी की मांग से संबंधित है। न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने याचिकाकर्ता दीपक मोहन सूरी को नोटिस जारी कर उसका पक्ष रखने को कहा है।

अब इस मामले की सुनवाई 14 फरवरी को होगी। भारत सरकार की ओर से अधिवक्ता सुमित पुष्करणा ने हलफनामा दायर करते हुए कहा कि (वियेना कन्वेंशन) राजनयिक संबंध अधिनियम 1972 के तहत भारत में रहने वाले किसी भी राजनयिक एवं राजदूत पर किसी भी प्रकार का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। 

न्यायालय मेें दीपक मोहन सूरी नामक एक व्यक्ति ने लिथुआनिया के राजदूत पेट्रस सिमेलियुनस के खिलाफ एक याचिका दायर कर राजदूत से 47.80 लाख रुपए दिलवाए जाने की मांग की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि बिजवासन में उसका ढाई एकड़ में बना पुष्पांजलि फार्म हाउस उक्त राजदूत को 2 लाख 75 हजार रुपए प्रति माह पर फरवरी 2012 में किराए पर दिया था। 

उसने 16 फरवरी 2012 को राजदूत के साथ 36 महीने की लीज एग्रीमेंट किया था। यह एग्रीमेंट एक मार्च 2012 से 28 फरवरी 2015 तक का था। इस एग्रीमेंट में 24 महीने का लॉकिंग पीरियड तय किया गया था। जिसके तहत 24 महीने तक किराएदार न मकान छोड़ेगा और न ही मकान मालिक घर खाली करने को कहेगा


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