29 गांवों को नगरपालिक निगम में शामिल करने कि अधिसूचना अवैध: उच्च न्यायालय

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Tuesday, February 04, 2014-12:07 PM

इंदौर: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर नगरपालिक निगम परिसीमा में समिलित किए जाने वाले ग्रामों के गत वर्ष के गजट नोटिफिकेशन अधिसूचना को निरस्त कर दिया। जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मूलचंद गर्ग एवं शांतनु केमकर ने यह आदेश दिया है। याचिकाकर्ता एवं अभिभाषक अनिल त्रिवेदी ने न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका प्रस्तुत करते हुए गुहार लगाईं थी कि मध्यप्रदेश पंचायत राज्य अधिनियम विधिवत गठित एवं संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य की परिभाषा में आने वाले 23 ग्राम पंचायतो के 29 ग्रामों को अवैध मनमानी कर असंवैधानिक प्रक्रि या अपनाकर इंदौर नगर पालिक निगम की सीमा में शामिल कर लिया गया हैं।

 

याचिककर्ता ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि मौजूदा स्थिति में नगरपालिक निगम इंदौर द्वारा 29 ग्रामो को अपनी परिसीमा में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था जिस पर जिला कलेक्टर ने 5 फरवरी 2013 को अधिसूचना जारी कर प्रस्ताव पर मोहर लगा दी। जबकि विधिसम्मत अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्यपाल को हैं अत: असंवैधनिक प्रक्रिया को अपना कर अधिसूचना जारी की गई। याचिकाकर्ता ने इंदौर नगरपालिक निगम की मौजूदा स्थिति बताते हुए अदालत के समक्ष तथ्य प्रस्तुत किए कि नगरपालिक निगम द्वारा अपने कार्य संचालन में 50 प्रतिशत मस्टर कर्मियो से कार्य करवाया जा रहा है एवं मौजूदा संसांधन से निगम शहर के नागरिको को दी जाने वाली व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से नहीं दे पा रहा हैं।

 

न्यायालय ने मध्यप्रदेश के मुख्यसचिव, नगरीय प्रशासन के उपसचिव, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास, इंदौर जिला कलेक्टर, इंदौर नगर पालिक निगम के आयुक्त द्वारा रखे गए पक्ष पर गौर करने के बाद के बाद आदेश दिया कि इंदौर नगर पालिक निगम की सीमा में 29 ग्रामो को शामिल किए जाने की जिला कलेक्टर द्वारा जारी की गई अधिसूचना संवैधनिक एवं अवैध है और उसे निरस्त किया जाता है।


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