बिन्नी ने विधानसभा स्पीकर के फैसले को दी चुनौती

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Monday, February 17, 2014-9:54 PM

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) से निष्कासित विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय का रूख कर दिल्ली विधानसभा के स्पीकर एम एस धीर के उस फैसले को चुनौती दी जिसमें पार्टी से निकाले जाने के बावजूद बिन्नी को ‘आप’ का सदस्य बनाए रखा गया है और वह पार्टी व्हिप का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।

न्यायमूर्ति मनमोहन के समक्ष सूचीबद्ध अपनी याचिका में बिन्नी ने आरोप लगाया कि स्पीकर एम एस धीर द्वारा एक पत्र के जरिए दिया गया वह जवाब ‘‘सरासर गैर-कानूनी और पूर्वाग्रह से ग्रसित’’ है जिसमें उन्होंने पूछा था कि निष्कासन के बाद भी क्या वह ‘आप’ के सदस्य बने हुए हैं क्योंकि उन्होंने अपनी इच्छा से सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया था।

याचिका में कहा गया, ‘‘प्रतिवादी संख्या-1 (स्पीकर) के कार्यालय द्वारा 11 फरवरी 2014 को जारी पत्र में सरासर गैर-कानूनी और पूर्वाग्रह से ग्रसित जवाब दिया गया है। वह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ और त्रुटिपूर्ण भी है।’’ बिन्नी की याचिका में कहा गया है, ‘‘प्रतिवादी संख्या-1 द्वारा यह काम याचिकाकर्त्ता को प्रतिवादी संख्या-2 (आप) के पक्ष में मतदान करने के लिए बाध्य करने के मकसद से किया गया और वह भी प्रतिवादी संख्या-2 के निर्देश पर क्योंकि प्रतिवादी संख्या-1 ने प्रतिवादी संख्या-2 के टिकट पर ही चुनाव लड़ा था।’’

पिछली 11 फरवरी को जारी स्पीकर के पत्र को दरकिनार करने की मांग करते हुए याचिका में कहा गया, ‘‘स्पीकर के कार्यालय ने कहा कि निष्कासन के बावजूद याचिकाकर्त्ता (बिन्नी) प्रतिवादी संख्या-2 (आप) के सदस्य हैं। जी विश्वनाथन बनाम तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर के मामले में उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के आलोक में यह निर्णय किया गया।’’


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