यूनिवर्सिटी का मकसद विद्यार्थियों को सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं है , उन्हें बेहतर नौकरी भी मिलनी चाहिए : प्रो. दिनेश सिंह

  • यूनिवर्सिटी का मकसद विद्यार्थियों को सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं है , उन्हें बेहतर नौकरी भी मिलनी चाहिए :  प्रो. दिनेश सिंह
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Thursday, February 20, 2014-10:47 PM
नई दिल्ली : दिल्ली विश्वद्यिालय के कुलपति प्रो. दिनेश सिंह ने  बुधावर को टैगोर थियेटर में  सोसाइटी फॉर प्रमोशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन इंडिया (एसपीएसटीआई) की ओर से हायर एजूकेशन पर कराए गए सेमिनार में  कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) से हर साल करीब 60 हजार युवाओं को डिग्री मिलती है। लेकिन, रोजगार कितने युवाओं को मिला इसकी कोई जानकारी नहीं होती है। 
 
उन्होंने कहा कि कालेज या यूनिवर्सिटी का मकसद विद्यार्थियों को सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं है। उन्हें बेहतर नौकरी भी मिलनी चाहिए। इसके लिए देश में हायर एजूकेशन को नई दिशा देने की जरूरत है। यह विचार  कार्यक्रम में पीयू कुलपति प्रो.अरुण कुमार ग्रोवर, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर्ड डीडीएस संधू ने भी शिरकत की। 
 
कार्यक्रम का संचालन एसपीएसटीआई प्रेसिडेंट और हरियाणा के पूर्व आईएएस अधिकारी धर्मबीर, वाइस प्रेसिडेंट सुमन बेरी, प्रो.आईबीएस पासी भी मौजूद थे। ट्राइसिटी के विभिन्न स्कूल और कालेज के सैकड़ों विद्यार्थियों ने 21वीं सदी में भारत उच्चतर शिक्षा की भूमिका पर शिक्षाविदों के विचारों को सुना। 
 
2013 में डीयू में चार वर्षीय इंटीग्रेटेस ग्रेजुएशन डिग्री को शुरू करने वाले प्रो. दिनेश ने कहा कि इंटरनेशनल स्तर पर खुद को स्थापित करने के लिए कालेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर कैरिकुलम में बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा कि हायर एजूकेशन स्तर पर प्रेक्टिकल ट्रेनिंग की कमी के कारण भी युवाओं को बेहतर रोजगार नहीं मिल पाता। हमे सोचना होगा कि सोसाइटी को क्या चाहिए। 
 
सिंह ने कहा कि देश में हजारों मैनेजमेंट कॉलेज खुले हैं, लेकिन किसी ने भी मुंबई के डिब्बेवाला पर मैनेजमेंट नजरिए से रिसर्च नहीं की है। उन्होंने देश में ओपन यूनिवर्सिटी की वकालत भी की। 
 
इस दौरान  टैगोर थियेेटर में हायर एजूकेशन पर आयोजित सेमिनार में बच्चों और प्रोफेशनल ने खुलकर सवाल जवाब किए। देश में क्वालिटी एजूकेशन से लेकर युवाओं को डिग्री के बाद भी रोजगार नहीं मिलने जैसे मुद्दे शिक्षाविदों के सामने उठाए गए। आईआईटी रोपड़ की एक शिक्षिका ने इंस्टीट्यूट को मिलने वाली रैंकिंग को लेकर ही सवाल उठा दिए। 
 

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