‘त्रिदेवी’ के हाथ रहेगी केंद्र सत्ता की चाबी

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Wednesday, March 19, 2014-5:09 PM

नई दिल्ली: देश में चल रहे लोकसभा चुनाव की ब्यार में राजनातिक दल अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने में लगे हैं। इन चुनावों में भाजपा ने जहां 272 प्लस का लक्ष्य रखा है, वहीं कांग्रेस तथा अन्य राजनीतिक दल सत्ता में भागीदार बनने के लिए ललायित हैं। ऐसे में अभी तक के मंथन में जो बात सामने आई है, उसमें यह साफ है कि अगर किसी भी राजनीतिक दल को बहुमत नहीं मिलता है तो देश की तीन महिलाओं के बिना सरकार बना पाना किसी के लिए भी संभव नहीं होगा। दूसरी तरह यह कहा जा सकता है कि सरकार किसी भी गठबंधन की बने लेकिन सत्ता की चाबी ममता बनर्जी, जयललिता या मायावती में से किसी एक के हाथ में रहना लगभग तय है।

मायावती: बेहतर पोर्टफोलिया की तलाश
उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से अधिक से अधिक हिस्सा हासिल करना हर पार्टी की कोशिश है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाली मायावत्ती अगर 25 से अधिक सीटें लेने में सफल रहती हैं तो वह चुनावों के बाद सरकार गठन में बेहतर गेम प्लेयर की भूमिका निभा सकती हैं। वैसे मायावत्ती इस मामले में इतनी आसानी से किसी खेमे में जाने वाली नहीं है। पूर्व में समाजवादी पार्टी, भाजपा, कांग्रेस तथा वाम दलों के साथ मायावत्ती सहयोग कर चुकी हैं। अब अगर भाजपा की सरकार बनाने में मायावत्ती मदद करती हैं, तो संभव है कि वह किसी बेहतर मंत्रालय की तलाश में रहेंगी। जिसके लिए भाजपा को न चाहते हुए भी सत्ता सुख लेने के लिए हां करनी ही होगी। बेशक उत्तर प्रदेश में मायावत्ती की पार्टी भाजपा के खिलाफ लड़ रही है।


ममता बनर्जी: फूंक कर रखना होगा कदम
ममता बनर्जी की पार्टी त्रिणमूल कांग्रेस को वेस्ट बंगाल में 42 में से 30 सीटें जीतने की उम्मीद है। अगर उन्हें यह आंकड़ा मिलता है तो वह वाम दलों की बजाए अन्य किसी विकल्प की तरफ जा सकती हैं। कांग्रेस के साथ वह पहले ही बिगाड़ चुकी हैं। ऐसे में भाजपा उनके लिए एक अन्य विकल्प हो सकता है। भाजपा को भी बहुमत से दूर रहने के चलते ममता बनर्जी का सहयोग फायदा दे सकता है, जबकि ममता को गौर करना होगा कि वह फूंक फूंक कर कदम रखें। क्योंकि उनके पास मुस्लिम वोट बैंक भी है तो वह भाजपा को सहयोग दें या न दें, इस बात को लेकर उन्हें गहन विचार करना होगा। वैसे ममता पहले राजग सरकार में सहयोगी रह चुकी हैं। इस सब के बीच ममता क्योंकि स्वयं प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में से एक हैं तो संभव है वह राजनीतिक माहौल को लेकर विचार कर सकती हैं। राजग को बाहर से समर्थन देने का विकल्प भी उनके पास खुला रहेगा।

जयललिता: रास्तों के बहुविकल्प
तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जे. जयललिता पूर्व में केंद्र की कई सरकारों में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। इस बार के चुनाव के बाद तमिलनाडू व पांडुचरी की 40 सीटों में से ए.आई.डी.एम.के. प्रमुख जयललिता 25 सीटों की उम्मीद लगा कर बैठी हैं। अगर उनकी उम्मीद पूरी होती है तो वह केंद्र की किसी भी पार्टी या वाम दलों की सरकार में बेहतर रोल प्ले कर सकती हैं। जयललिता अब तक किंग मेकर की भूमिका में रही हैं लेकिन अब उनके दिलो दिमाग में प्रधानमंत्री पद को लेकर भी कहीं न कहीं कोई सोच पल रही है। जयललिता को भाजपा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के करीबी सहयोगियों में गिना जाता है, लेकिन उनके पास भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस व वाम दल भी खुला विकल्प है। साथ ही वह प्रधानमंत्री बनने की बजाए राज्य के मुख्यमंत्री पद को अधिक अहमियत दे सकती हैं।

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