इंदिरा गांधी की राह पर चले मोदी!

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Friday, March 28, 2014-2:07 PM

नई दिल्ली: इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के पहले ऐसे घोषित प्रत्याशी हैं जो एक साथ दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी 16वीं लोकसभा के आसन्न चुनाव में वडोदरा और वाराणसी दोनों ही सीट से ताल ठोंक रहे हैं।

भाजपा के प्रतिद्वन्द्वियों का कहना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं इसीलिए वह दो सीटों से लड़ रहे हैं जबकि भाजपा का कहना है कि मोदी वाराणसी से इसलिए चुनाव नहीं लड़ रहे हैं कि वह वडोदरा से अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं है बल्कि उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी से उनके चुनावी समर में उतरने से पूर्वांचल और बिहार पर अच्छा असर पड़ेगा जिससे पार्टी की सीटें बढ सकती हैं।

इससे पहले इंदिरा गांधी को छोड़कर पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर सर्व लाल बहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई, राजीव गांधी, आई के गुजराल, वी पी सिंह, चंद्रशेखर और चौधरी चरण सिंह जैसे प्रधानमंत्री पद के सभी घोषित प्रत्याशियों ने एक ही सीट से चुनाव लड़ा था।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के अन्य उम्मीदवार अटल बिहारी वाजपेयी ने भी सिर्फ लखनऊ सीट से ही चुनावी समर में उतरे थे। हालांकि पहले के चुनावों में वह दो सीटों से चुनाव मैदान में उतरे थे लेकिन तब वह प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं थे। जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद 1980 के आम चुनावों में इंदिरा गांधी ने उत्तर प्रदेश की अपनी पारंपरिक सीट रायबरेली और आंध्रप्रदेश की मेडक सीट से चुनाव लड़ा था। राजनारायण ने 1971 में रायबरेली से इंदिरा गांधी के चुनाव को न्यायालय में चुनौती दी थी। राजनारायण की याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया था। इसके बाद ही 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगा दिया गया था। बाद में 1978 में इंदिरा गांधी को लोकसभा में वापस लाने के लिए उन्हें चिकमंगलूर उप चुनाव में मैदान में उतारा गया। वर्ष 1980 के आम चुनावों में जब इंदिरा गांधी अपनी रायबरेली सीट से चुनाव लडऩे आईं तो विपक्ष ने उनसे मुकाबले के लिए ग्वालियर की राजमाता विजया राजे सिंधिया को मैदान में उतारा।

आपातकाल के दौरान राजमाता को तिहाड़ जेल में कैद किया गया था। विजया राजे के मैदान में आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने इंदिरा गांधी का संसद में प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए उन्हें मेडक सीट से भी उतारा। हालांकि राजनीति की चतुर खिलाड़ी इंदिरा गांधी दोनोंं ही सीटों से चुनाव जीत गयीं लेकिन उन्होंने रायबरेली सीट को छोडऩे का फैसला किया।

अब 24 वर्ष बाद 2014 के लोकसभा चुनावों में यदि मोदी दोनों की सीटों से चुनाव जीत जाते हैं तो यह देखना दिलचस्प होगा कि वह वडोदरा और वाराणसी में से किस सीट को छोड़ते हैं। सर्वाधिक 80 सीटों वाला राज्य उत्तर प्रदेश अब तक देश को आठ प्रधानमंत्री दे चुका है इसलिए वाराणसी सीट से मोदी को चुनाव लड़ाना भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है ताकि इस हिंदी भाषी मुख्य क्षेत्र में भी उनकी स्वीकार्यता बढ़ सके। पार्टी यह भी साबित करना चाहती है कि मोदी का करिश्मा सिर्फ गुजरात तक ही सीमित नहीं है।

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