इमरान मसूद पर भारी न पड़ जाए भड़काऊ भाषण !

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Saturday, March 29, 2014-10:27 PM

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी पर अपने भाषण के कारण सुर्खियों में आए सहारनपुर से कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद का सियासी जीवन बेहद उथल-पुथल भरा रहा है। इमरान मसूद भाषणों में अपने गरम मिजाज और जुबान पर नियंत्रण नहीं रख पाने के लिए चर्चित हैं और आखिरकार अपने इसी मिजाज के कारण मोदी पर टिप्पणी को लेकर शनिवार को उनकी गिरफ्तारी हुई।

मसूद की सियासी शख्सियत पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनाव में इमरान मसूद ने जिस सक्रियता का परिचय देकर जनपद सहारनपुर में सातों विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी के साथ-साथ भाजपा को चुनौती दी थी, उन्हीं कोशिशों का नतीजा था कि 2012 विधानसभा चुनाव में सहारनपुर की सातों सीटों पर कांग्रेस को 1947 के बाद पहली बार इतना अधिक वोट मिला था कि जिसकी कांग्रेस पार्टी ने भी कल्पना नहीं की थी।

इस बीच इमरान मसूद के सपा में चले जाने के बाद कांग्रेस की स्थिति पहले जैसी नजर आने लगी थी। वहीं लोकसभा चुनाव की घोषणा के मात्र तीन दिन बाद जब से कांग्रेस हाईकमान ने सहारनपुर लोकसभा सीट पर इमरान मसूद को पार्टी प्रत्याशी बनाया, तभी से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में खलबली पैदा हो गई थी। दरअसल, मसूद के आने के बाद जहां क्षेत्रीय लड़ाई रोचक होती नजर आ रही थी, वहीं भाजपा, सपा और बसपा को भी यह मुकाबला बेहद कठिन नजर आ रहा था।

इमरान मसूद अपने बलबूते पर 2007 के विधानसभा चुनावों में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के नजदीकी कद्दावर काबीना मंत्री जगदीश सिंह राणा को उनके गृह क्षेत्र मुजफ्फराबाद में आजाद उम्मीदवार की हैसियत से लगभग छह हजार वोटों से हराकर विधायक बने थे। अब जगदीश सिंह राणा सपा से हटकर बहुजन समाज पार्टी से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में सहारनपुर लोकसभा सीट पर बसपा के सांसद हैं।

इमरान मसूद का मुकाबला नौ वर्ष बाद पुन: जगदीश सिंह राणा के साथ होने जा रहा है। इमरान मसूद गत वर्षों में नगर निगम के चेयरमैन भी रह चुके हैं और आज भी मुस्लिमों के एक बड़े वर्ग के बीच उनकी पैठ है। जिस बयान को लेकर उनकी गिरफ्तारी हुई है, वह भले ही उन्होंने जोश में चुनावी माहौल अपने पक्ष में करने के लिए दिया हो, लेकिन तब उन्हें भी इस बात का इल्म नहीं रहा होगा कि इसकी वजह से वह विवादों में घिर जाएंगे और उनकी गिरफ्तारी तक की नौबत आ जाएगी। अब देखना है कि मसूद का यह रवैया जनता के बीच क्या असर दिखाता है, और भड़काऊ भाषणों से उन्हें कितना सियासी फायदा या नुकसान होता है।

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