देश के विकास में जनता की भागेदारी सबसे बड़ा मंत्र: मोदी

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Wednesday, April 02, 2014-3:03 PM

कोडरमा: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि देश के विकास में जनता की भागेदारी सबसे बड़ा मंत्र है मोदी यहां कोडरमा संसदीय क्षेत्र के झुमरी तिलैया के प्रखंड मैदान में पार्टी की एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश केवल एक व्यक्ति के दिमाग से नहीं चल सकता है बल्कि देश को चलाने के लिए 125 करोड़ जनता, उसके दिमाग उसकी सोच और उसके कलम की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 125 करोड़ लोगों की ताकत से देश विकास की बुलंदियों को प्राप्त करेगा।

केन्द्र सरकार की आलोचना

मोदी ने केन्द्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार केवल दिल्ली में सत्ता प्राप्त करने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार चुनाव को केवल सत्ता प्राप्ति के रुप में देखती है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एक मात्र ऐसे कांग्रेसी थे जो जनता के सहयोग से सरकार चलाते थे और जनता की ताकत पर विश्वास करते थे। उन्होंने कहा कि उस समय देश में अनाज आयात किया जाता था लेकिन शास्त्री ही थे जिन्होंने ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया और किसानों से खेती करने और अधिक से अधिक अन्न उपजाने का अनुरोध किया। हालांकि उन्होंने कहा कि क्या एसी आफिस में बैठकर फाईलों में खेती की जा सकती है, नहीं की जा सकती है।

 

उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों को अधिक से अधिक अवसर तथा मजबूती प्रदान करें। मोदी ने कहा कि पिछड़ा क्षेत्र होने के बावजूद भी यहां के किसान बहुत ही मेहनती है और आधुनिक तकनीक के माध्यम से खेती करना जानते है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने देश के प्रगतिशील किसानों का एक सम्मेलन गुजरात में बुलाया था जिसमे यहां के 12 किसानों को गुजरात सरकार ने सम्मानित किया था। उन्होंने कहा कि यह काम यहां की सरकार को करना चाहिये था लेकिन यहां कि सरकार ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि यहां के किसानों से जो जानकारी मिली उसका लाभ वहां के किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

 

मोदी ने दिल्ली सरकार की विफलता की चर्चा करते हुए कहा कि यहां के किसान नहीं जानते है कि कृषि विभाग और कृषि विश्वविद्यालय कहां पर है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय यह नहीं जानता है कि किसान क्या उपजा रहा है। किसान और कृषि विश्वविद्यालय के बीच तालमेल की कमी है। उन्होंने कहा कि अगर किसान और कृषि विश्वविद्यालय के बीच सामंजस्य स्थापित हो जाए। तो किसान नयी ऊंचांईयों को छू सकते है।

 

किसान केवल चावल की उपज अपने लिए नहीं करते है बल्कि वह देश के गरीबों को पेट भरने के लिए भी करते है। मोदी ने कहा कि दिल्ली सरकार ने प्रर्याप्त अनाज के गोदामों का भी निर्माण नहीं कर पाया है जिसके चलते देश में अनाज पानी से सड़ रहे हैं और बर्बाद हो रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने सरकार को गरीबों के बीच मुफ्त अनाज वितरण का निर्देश देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार अनाज का भंडारण सुनिश्चित करें जिससे की अनाज की बर्बादी न हो सकें। उन्होंने कहा कि गरीबों के बीच बांटे जाने वाले अनाज को सरकार सड़ा देती है और फिर उसे 80 पैसे प्रति किलो की दर से शराब व्यापारियों को बेच देती है। मोदी ने केन्द्र सरकार पर दोषारोपण करते हुए कहा कि वह यहां के प्राकृतिक संसाधनों को लूटने में लगी है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश खनिजों से परिपूर्ण है और यहां के कच्चे माल की चोरी और बिक्री न हो तो झारखंड की तस्वीर दूसरी होगी।

 

उन्होंने कहा कि यहां के कच्चे माल का प्रसंस्करण यही हो तथा बाजार उपलब्ध कराया जाए तो यहां के लोगों को नौकरी के लिये दूसरी जगह नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र में भाजपा की अगली सरकार बने या वह प्रधानमंत्री बने यह विषय नहीं है बल्कि जरुरी यह है कि गरीबों के आबाज को सुना जाए। मोदी ने कहा कि वह गरीब, कमजोर, मजदूरों, आदिवासियों और किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहते है तथा अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास पहुंचाना चाहते है। इस अवसर पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और कोडरमा संसदीय क्षेत्र से पार्टी उम्मीदवार रविन्द्र राय ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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