अखिलेश सरकार के दो साल: बड़ी उपलब्धियों के साथ रहा विवादों का भी साया

  • अखिलेश सरकार के दो साल: बड़ी उपलब्धियों के साथ रहा विवादों का भी साया
You Are HereUttar Pradesh
Friday, March 14, 2014-1:25 PM

लखनउ: चुनावी वर्ष में अपने कार्यकाल के दो साल पूरे कर रही उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के लिए यह अवधि लखनउ मेट्रो, आईटी सिटी जैसे अवस्थापना तथा अन्य क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों की गवाह रही, वहीं मुजफ्फरनगर में हुए दंगे तथा उनकी विभीषिका और दुर्गाशक्ति नागपाल निलम्बन प्रकरण उसके लिए परेशानी का कारण बने।

विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ 15 मार्च 2012 को सत्तारूढ़ हुई सपा की नजर में इन दो वर्षों में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भविष्य में खुद को ‘विकास पुरुष’ के रूप में याद किये जाने की पुख्ता जमीन तैयार कर ली है, वहीं विपक्ष अखिलेश सरकार को हर मोर्चे पर विफल मानता है ।

सपा के प्रान्तीय प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि महज दो साल के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में मेट्रो, आईटी सिटी और नए बिजली कारखानों के निर्माण की शुरुआत के अलावा छात्र-छात्राओं को मुफ्त लैपटाप, बेरोजगारी भत्ता योजना, कौशल विकास कार्यक्रम, लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने में मदद के लिए ‘हमारी बेटी, उसका कल’ योजना जैसे क्रांतिकारी कदम उठाकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भविष्य में खुद को ‘विकास पुरुष’ के रूप में याद किये जाने का आधार तैयार कर लिया है।

उन्होंने कहा कि दो साल में हुए बुनियादी कार्यों का असर आने वाले एक-दो साल में नजर आयेगा और तब लोग सपा सरकार की दूरदर्शितापूर्ण योजनाओं और कार्यों का मूल्यांकन करेंगे। चौधरी ने कहा कि सरकार ने अद्वितीय इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए लखनउ मेट्रो परियोजना की शुरुआत कर दी है जो दो-तीन साल में मुकम्मल हो जाएगी।

इसके अलावा लखनउ में आईटी सिटी का शिलान्यास भी हो चुका है। इससे आने वाले वर्षों में प्रौद्योगिकी कौशल से लैस हजारों लोगों को नौकरी के लिये नोएडा और गुडग़ांव नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें लखनउ में ही रोजगार मिलेगा। चौधरी ने कहा कि सरकार के दो साल सफल रहे हैं।

इस दौरान विकास हुआ है और घोषणापत्र के ज्यादातर वादे पूरे किये जा चुके हैं। पूरे देश के राज्यों में सरकारें उत्तर प्रदेश के विकास के मॉडल को अपना रही हैं। सरकार में जनता का भरोसा पुख्ता हुआ है। सरकार ने लोकतंत्र बहाल किया है और भ्रष्टाचार पर रोक लगार्इ है।
 
हालांकि, सरकार अपने घोषणापत्र में किसान आयोग के गठन, अल्पसंख्यकों को उनकी आबादी के हिसाब से अलग से आरक्षण देने, गरीब बुनकरों को मुफ्त बिजली, राजकीय सुरक्षा बलोंं में मुसलमानों की भर्ती के विशेष प्रावधान तथा कक्षा 10 पास करके अगले दर्जे में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को टैबलेट देने के वादे पूरे नहीं कर सकी।

इस पर सपा प्रवक्ता कहते हैं कि सरकार का चुनाव घोषणापत्र पांच साल के लिए है, लिहाजा आने वाले समय में ये वादे पूरे कर दिए जाएंगे। दूसरी ओर, विपक्ष की नजर में सरकार के दो साल के कार्यकाल में विकास रुक गया और स्थितियां पहले से ज्यादा खराब हुई हैं।

भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक के मुताबिक अपने गठन के पहले दिन से ही कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर नाकाम हुई सरकार जब दूसरा साल पूरा कर रही है तो उसमें निरंतर गिरावट है। योजनाओं से लेकर निर्णयों तक में भ्रम और असमंजस की स्थिति रही जिसके कारण छोटी-छोटी घटनाएं राज्य में बड़े तनाव की वारदात का कारण बनीं।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्णयों के मामले में, चाहे वह राज्य कर्मचारियों की 15 साल बाद हुई हड़ताल रही हो, या फिर अभी हाल में हुई जूनियर डाक्टरों की हड़ताल रही हो, हर बार न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसका मतलब यह है कि समस्याओं की जड़ पर सरकार की नजर नहीं रही, अन्यथा उन्हें अनदेखा किया गया।
 


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You