साइकिल पर पोलो का रोमांच

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Wednesday, January 22, 2014-9:09 AM

पोलो अभिजात्य वर्ग का खेल है जिसे स्मार्ट यूनिफॉर्म में सजे खिलाड़ी घोड़ों पर बैठ कर खेलते हैं परंतु बाइक पोलो के साथ ऐसा नहीं है। इस खेल को आम से आम लोग साइकिल पर, कैसे भी कपड़ों में, टैनिस बॉल से भी खेल लेते हैं।

1990 के दशक में सीएटल की एक कुरियर कम्पनी के राइडर्स ने काम के बीच खाली समय बिताने के लिए इस खेल को ईजाद किया था जिसे अब दुनिया भर में खेला जाता है। इसकी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं भी आयोजित होने लगी हैं। इसे तीन-तीन लोगों की टीमें आमतौर पर 15 मिनट के लिए खेलती हैं। इसे अक्सर किराए पर लिए टैनिस कोर्ट पर ही खेला जाता है और गोल आमतौर पर पिच के अंत में रखे जाते हैं। खिलाड़ी साइकिल पर सवार होकर मैलेट (गेंद पर वार करने वाली खास तरह की छड़ी) से बॉल को अपने नियंत्रण में रखते हुए विरोधी टीम के गोल में डालने का प्रयास करते हैं।
 
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में भी बाइक पोलो खासी लोकप्रिय है जहां इसके अनेक दीवाने मौजूद हैं। पारम्परिक रूप से यह कुछ हद तक एक सामाजिक खेल है। घोड़े पर खेले जाने वाले पोलो की ही तरह बाइक पोलो खेलने वालों का भी एक खास वर्ग बन चुका है जिसमें अधिकतर युवा, शहरी तथा पारम्परिक खेलों की गम्भीरता तथा अनुशासन से उकता चुके लोग शामिल हैं।

पुरुष तथा महिलाएं इसे एक साथ खेलते हैं जिसके लिए किसी खास वर्दी की जरूरत नहीं होती और पुरानी साइकिलों के हिस्सों को जोड़ कर घर पर अपने लिए तैयार की साइकिल को खूब पसंद किया जाता है। गत 6 महीनों से बाइक पोलो खेल रही जैनी स्लेड जीवन भर खेलों से भागती रही थी। खेलने के लिए उसने शुरूआत 25 डॉलर की साइकिल से की थी। वह कहती है कि आप खेलते-खेलते ही इसे सीख जाते हैं।

वैसे इस खेल को गम्भीरता से लेने वालों की भी कमी नहीं है और अब तो इस खेल के लिए विशेष रूप से तैयार किए जाने वाले साइकिल भी बाजार में मिलने लगे हैं। अब खिलाड़ी हैल्मेट, गल्व्स तथा अन्य सुरक्षात्मक गीयर पहनने लगे हैं। खेल के नियम बनाए जा रहे हैं तथा टूर्नामैंट के लिए रैफरी भी रखे जाने लगे हैं।

इस साल सिडनी में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। खेल के पेशेवर होने से हो सकता है कि आने वाले समय में  इसकी कोचिंग शुरू हो जाए तथा खेलों के लिए प्रायोजक, विज्ञापनदाता मिल जाएं।

परंतु इस खेल को पसंद करने वाले लोगों को भय है कि ऐसा होने पर इस खेल के साथ अभी तक जुड़ी आजादी तथा मजा जाता रहेगा। डैनी कहते हैं कि आप इस खेल को सीखने के लिए यदि किसी को प्रति घंटे के हिसाब से फीस देते हैं तो इसे अपने बूते पर सीखने वाला मजा नहीं रह जाएगा।


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