Edited By ,Updated: 19 Oct, 2026 03:37 AM

गत सप्ताह अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अचानक एक ‘ऊर्जा युद्धविराम’ की घोषणा करते हुए ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा,‘‘अभी से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में ‘ऊर्जा युद्धविराम’ लागू होता है। दोनों पक्ष इस पर सहमत हो गए हैं। इसे न तोड़ें!’’
गत सप्ताह अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अचानक एक ‘ऊर्जा युद्धविराम’ की घोषणा करते हुए ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा,‘‘अभी से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में ‘ऊर्जा युद्धविराम’ लागू होता है। दोनों पक्ष इस पर सहमत हो गए हैं। इसे न तोड़ें!’’हालांकि, ट्रम्प के इन दावों के बावजूद, रूस ने यूक्रेन के नागरिक बुनियादी ढांचे पर भारी हमले जारी रखे हैं।
रूस ने यूक्रेन के प्रमुख बिजली संयंत्रों को निशाना बनाने के लिए हाइपरसोनिक और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे यूक्रेन की राजधानी कीव सहित कई शहरों में घंटों तक बिजली और पानी की आपूर्ति ठप्प रही। इस घटनाक्रम से स्पष्टï है कि रूस और यूक्रेन के बीच ‘ऊर्जा युद्धविराम’ कराने की व्हाइट हाऊस की एकतरफा कोशिश 24 घंटों में ही ठुस्स हो गई है। डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनियों के बावजूद यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। मास्को ने यूक्रेन पर रियाजान क्षेत्र में एक रूसी तेल रिफाइनरी पर हमला करने का आरोप लगाया है। मास्को का दावा है कि यूक्रेन के एंटी-एयरक्राफ्ट फायर से गिरे एक ड्रोन के मलबे के रिफाइनरी से टकराने से आग लग गई।
ट्रम्प द्वारा अचानक ‘ऊर्जा युद्धविराम’ की घोषणा के बाद ऐसा होना (जबकि रूस और यूक्रेन दोनों ने ही नहीं कहा है कि वे इस पर सहमत हैं) कोई आश्चर्य की बात नहीं है! ट्रम्प ने यूक्रेेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की मांग की है। उनका दावा है कि इन्हीं हमलों की वजह से दुनिया भर में डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। ट्रम्प ने तो जेलेंस्की को बदलने तक की धमकी दे डाली है। लेकिन यूरोपियन देशों का यूक्रेन का साथ न छोडऩा और जेलेंस्की को शांत रहने की सलाह देना शायद कुछ दिन काम कर जाए क्योंकि ट्रम्प ने तो अभी अपने देश के मध्यावधि चुनावों पर ध्यान केंद्रित किया हुआ है।
चूंकि डीजल की कीमतेें कम करने के लिए उन्होंने रूस से तेल खरीदने की संधि की है, अत: कोई कूटनीतिक समझ नहीं होने के कारण ट्रम्प के लिए जेलेंस्की का अपमान करना (जिसकी शुरुआत तब हुई थी जब जेलेंस्की पहली बार ओवल ऑफिस में ट्रम्प से मिलने आए थे) काफी आसान है। उनके लिए बस ‘ताकतवर’ और ‘कमजोर’ आदमी का कान्सैप्ट ही मायने रखता है। और अब तो ऐसा लगने लगा है कि 5 वर्षों से जारी यह युद्ध दूसरे देशों तक फैल सकता है। रोमानिया के राष्ट्रपति ‘निकुशोर डैन’ ने 15 अक्तूबर को कहा कि रूस के 2 ड्रोनों ने उनके हवाई क्षेत्र में घुस कर उनके 2 कैमिकल टैंकरों पर हमला कर दिया, जिससे जहाजों को आग लग गई। बचाव दल कम से कम 7 लापता नाविकों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा,‘‘काला सागर में स्थिति गंभीर है। व्यावसायिक जहाजों पर हमले हो रहे हैं और उन्हें डुबोया जा रहा है।’’
इस बीच जेलेंस्की ने 14 अक्तूबर को रूसी तेल रिफाइनरियों पर फिर से हमले शुरू करने की बात कही। उन्होंने कुछ समय के लिए इन हमलों को इसलिए रोका था, ताकि यह दिखाया जा सके कि यूक्रेन शांति वार्ता के लिए तैयार है। उन्होंने ‘फाइनांशियल टाइम्स’ से कहा, ‘‘रिफाइनरियों पर हमले रोकने का फैसला अब खत्म हो गया है। बस, बहुत हो गया।’’ रूस के 360 से अधिक ड्रोनों ने यूक्रेन में ‘किरोवोहराद’, जहां रूस के नजदीकी अन्य इलाकों की तुलना में कम हमले हुए हैं, को निशाना बनाया। इन हमलों में 3 लोगों की मौत और 6 लोग घायल हो गए। इस बीच ‘स्पेसएक्स’ के प्रमुख एलन मस्क, जो यूक्रेन की सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ‘स्टारङ्क्षलक’ टर्मिनल बनाते हैं, अमरीका में जेलेंस्की के एक प्रमुख आलोचक के रूप में सामने आए हैं।
आजकल ट्रम्प के साथ फिर जुडऩे को प्रयत्नशील एलन मस्क ने 15 अक्तूबर को ‘स्टारलिंक सिस्टम’ को बंद करने के आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि इन्हें अमरीका सरकार नियंत्रित करती है। लेकिन जेलेंस्की के इस बयान पर कि यूक्रेन रूस की हार तक लड़ता रहेगा, सोशल मीडिया पर मस्क ने लिखा,‘‘और इस तरह यह कत्लेआम जारी है... अब जेलेंस्की के जाने का समय आ गया है।’’ऐसा पहली बार नहीं है जब अमरीका अपने सहयोगियों को धोखा दे रहा हो, लेकिन ट्रम्प के दौर में यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक नियम सा बन गया है। अमरीका के सबसे पुराने और मजबूत सहयोगियों कनाडा, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया को जब भी ट्रम्प का मन किया, अपमानित किया और उनके साथ विश्वासघात किया है।
इससे न केवल पूरी दुनिया में आॢथक अव्यवस्था फैल रही है, बल्कि सर्वाधिक नुकसान अमरीका की लंबे समय से चली आ रही प्रतिष्ठा और ताकत को हो रहा है। शायद 16 दिन बाद अमरीका में होने वाले मध्यावधि चुनाव इस स्थिति पर कुछ हद तक लगाम लगा सकें।ऐसे घटनाक्रम के बीच तो यही कहा जा सकता है कि यदि इन देशों के नेताओं ने ‘गालिब’ को पढ़ा होता तो वे ट्रम्प के बारे में कुछ यूं कहते : ‘‘हमको उनसे वफा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफा क्या है!’’