Edited By Niyati Bhandari,Updated: 19 Oct, 2026 03:57 PM

Aparajita Pujan Tantrik Upay: विजयादशमी के दिन माता अपराजिता के पूजन का विशेष महत्व है। जानें कोर्ट-कचहरी, व्यापार और विरोधियों से मुक्ति पाने के विशेष तंत्र-ज्योतिष उपाय, पूजन विधि और अपराजिता स्तुति।
Aparajita Pujan Tantrik Upay अपराजिता पूजन तांत्रिक उपाय: उत्तर भारत में आश्विन शुक्ल पक्ष के नवरात्र संपन्न होने के उपरांत विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार दशहरे का वास्तविक नाम 'विजयादशमी' है, जिसे 'अपराजिता पूजा' भी कहा जाता है। माता अपराजिता सकल सिद्धियों को प्रदान करने वाली साक्षात माता दुर्गा का ही स्वरूप हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने राक्षस रावण से युद्ध के लिए प्रस्थान करने से पूर्व विजयादशमी के दिन माता अपराजिता का पूजन किया था। इसके अतिरिक्त, यात्रा के ऊपर भी माता अपराजिता का ही अधिकार माना जाता है।
विरोधियों से मुक्ति पाने के लिए विशेष तंत्र एवं ज्योतिष आधारित उपाय
यदि आप व्यापार में उलझन, भूमि संबंधी विवाद, कोर्ट-कचहरी या सरकारी कार्यों में रुकावटों से परेशान हैं, तो विजयादशमी के दिन तंत्र एवं ज्योतिष पर आधारित इस सुगम उपाय को करने से शीघ्र लाभ प्राप्त हो सकता है:
आवश्यक सामग्री:
हरा मिठाई वाला पेठा: 1
सफेद वस्त्र: 1/4 (एक चौथाई) मीटर
सिंदूर: 2 पैकेट
लौंग: 20 ग्राम
काले साबुत मांह: 20 ग्राम
काले तिल: 20 ग्राम
काली सरसों: 20 ग्राम
लोहे की कील: 7
चाकू: 1
जल की डिब्बी: 2

उपाय करने की विधि:
नाम उकेरना: सफेद वस्त्र बिछाकर चाकू की नोक से उसके चारों कोनों तथा कपड़े के केंद्र में अपने विपक्षी/प्रतिद्वंद्वी का नाम उकेरें।
पेठे पर नाम लिखना: इसके बाद अपनी तर्जनी उंगली से काजल की सहायता से हरे पेठे पर नीचे से ऊपर की ओर विरोधी का नाम लिखें।
पेठा काटना: तेज चाकू से पेठे को ठीक वहीं से बीचों-बीच काट दें जहां नाम लिखा गया है।
काजल लगाना: कटे हुए पेठे के दोनों सफेद हिस्सों को भी काजल से पूरी तरह काला कर दें।
सामग्री भरना: बाकी का सारा सामान पेठे के कटे हुए भागों के बीच रखकर उसे उसी सफेद कपड़े में लपेट लें।
जल प्रवाह: दोपहर के बाद या सूर्यास्त के समय, किसी भी बहते जल में अपने प्रतिद्वंद्वी का नाम लेकर इसे जल प्रवाह कर दें और कार्य पूरा होने की प्रार्थना करें।
40 दिनों का अखंड दीपक और अपराजिता स्त्रोत पाठ
जल प्रवाह के बाद माता अपराजिता के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद लगातार 40 दिनों तक माता अपराजिता के समक्ष अखंड दीपक प्रज्वलित रखें और 'अपराजिता स्त्रोत' का निरंतर पाठ करें।
अपराजिता पूजन का शुभ मुहूर्त और यात्रा स्तुति
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार माता अपराजिता के पूजन का सबसे उत्तम समय अपराह्न (अर्थात दोपहर के तत्काल बाद) का माना गया है। अपराह्न से लेकर संध्या काल के बीच कभी भी माता अपराजिता की पूजा करके यात्रा प्रारंभ की जा सकती है। यात्रा में कोई विघ्न न आए, इसके लिए प्रस्थान करते समय निम्नलिखित स्तुति का पाठ करना चाहिए:
"शृणुध्वं मुनय: सर्वे सर्वकामार्थसिद्धिदाम्। असिद्धसाधिनीं देवीं वैष्णवीमपराजिताम्।। नीलोत्पलदलश्यामां भुजङ्गाभरणोज्ज्वलाम्। बालेन्दुमौलिसदृशीं नयनत्रितयान्विताम्।। पीनोत्तुङ्गस्तनीं साध्वीं बद्धद्मासनां शिवाम्। अजितां चिन्येद्देवीं वैष्णवीमपराजिताम्।।"
