Edited By Niyati Bhandari,Updated: 21 Oct, 2026 05:21 PM

Kartik Month 2026 Dates: हिंदू पंचांग के 8वें पवित्र कार्तिक मास की शुरुआत 27 अक्तूबर 2026 से हो रही है। जानें, ब्रह्म मुहूर्त स्नान, तुलसी पूजन, देवउठनी एकादशी व तुलसी विवाह की सही तिथि (21 नवंबर 2026) और जरूरी नियम।
Kartik Month 2026 Dates: हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का आठवां महीना यानी कार्तिक मास धार्मिक दृष्टि से सबसे पवित्र और फलदायी माना गया है। इस वर्ष 27 अक्तूबर 2026 से इस पावन महीने का शुभारंभ हो रहा है, जिसका समापन 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा पर होगा। कृष्ण भक्त 22 अक्तूबर 2026 से 21 नवम्बर 2026 तक कार्तिक व्रत अथवा दामोदर व्रत का पालन करेंगे। मान्यता है कि इस पूरे महीने नियमपूर्वक स्नान-दान और दीपदान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
27 अक्तूबर से होगी कार्तिक मास की शुरुआत
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष पवित्र कार्तिक महीने का प्रारंभ 27 अक्तूबर 2026 से होने जा रहा है। इस पावन माह का समापन 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन होगा। सनातन परंपरा में यह वर्ष का आठवां महीना होता है और इसे सभी 12 महीनों में सबसे अधिक पुण्यदायी और श्रेष्ठ दर्जा दिया गया है।

तुलसी पूजन और तुलसी विवाह की तिथि
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष तुलसी विवाह 21 नवंबर 2026 (दिन शनिवार) को मनाया जाएगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने की अलग-अलग महिमा है। शास्त्रों में चातुर्मास में आने वाले कार्तिक मास को धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष देने वाला माना गया है। तुला राशि पर सूर्यनारायण के आते ही कार्तिक मास प्रारंभ हो जाता है। इस मास में तुलसी पूजा का बहुत महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण ने इस मास की व्याख्या करते हुए कहा है,‘पौधों में तुलसी मुझे प्रिय है, मासों में कार्तिक मुझे प्रिय है, दिवसों में एकादशी और तीर्थों में द्वारका मेरे हृदय के निकट है।’
आंवले के फल व तुलसी-दल मिश्रित जल से स्नान करें तो गंगा स्नान के समान पुण्यलाभ होता हैं। कार्तिक मास में मनुष्य की सभी आवश्यकताओं जैसे- उत्तम स्वास्थ्य, पारिवारिक उन्नति, देव कृपा आदि का आध्यात्मिक समाधान बड़ी ही आसानी से हो जाता है।
कार्तिक माह में तुलसी पूजन करने तथा सेवन करने का विशेष महत्व बताया गया है। जो व्यक्ति यह चाहता है कि उसके घर में सदैव शुभ कर्म हो, सदैव सुख शान्ति का निवास रहे उसे तुलसी की आराधना अवश्य करनी चाहिए। जिस घर में शुभ कर्म होते हैं वहां तुलसी हरी-भरी रहती है एवं जहां अशुभ कर्म होते हैं वहां तुलसी कभी भी हरी-भरी नहीं रहती।
कार्तिक मास में तुलसी पूजन का खासा महत्व बताया गया है। इसके समीप दीपक जलाने से मनुष्य अनंत पुण्य का भागी बनता है। जो तुलसी को पूजता है उसके घर मां लक्ष्मी हमेशा के लिए आ बसती है, क्योंकि तुलसी में साक्षात लक्ष्मी का निवास माना गया है।
पौराणिक कथा के अनुसार गुणवती नामक स्त्री ने कार्तिक मास में मंदिर के द्वार पर तुलसी की एक सुंदर वाटिका लगाई। उस पुण्य के कारण वह अगले जन्म में सत्यभामा बनी और सदैव कार्तिक मास का व्रत करने के कारण वह भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी बनी।

कार्तिक मास में अपनाएं ये कड़े नियम
कार्तिक के महीने में व्यक्ति को पूर्णतः सात्विक एवं संयमित जीवन जीना चाहिए:
भोजन संबंधी नियम: अपने भोजन में प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक खाद्य पदार्थों का पूरी तरह परहेज करें। सरसों-सरसों तेल, राजमां , उड़द की दाल, बैंगन, लौकी, परवल, सेमफली, हींग, सोयाबीन (न्युट्री,दाल, तेल इत्यादि), एवं टमाटर का प्रयोग वर्जित है।
शयन नियम: इस पावन महीने में जमीन पर सोना शुभ माना जाता है। ब्रह्मचर्य व्रत का भी पालन करना चाहिए ।
दान-पुण्य: निर्धन और जरूरतमंद लोगों को अन्न व वस्त्र का दान करें।
सदाचार: किसी भी व्यक्ति की निंदा या बुराई करने से बचें और मन-वचन से शुद्ध रहें। अधिक से अधिक श्रवण- कीर्तन करना चाहिए।
