Edited By Tanuja,Updated: 21 Oct, 2026 06:31 PM

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत में पिछले तीन महीनों से जारी प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती और हिरासतों पर चिंता जताई है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की। भारत ने जवाब में कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव...
New York: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत में पिछले तीन महीनों से जारी युवा नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच कराने और विरोध प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने की अपील की है। वहीं, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट किया है कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या किसी देश को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत के आंतरिक मामलों में जरूरत से ज्यादा दखल दे रही हैं? भारत ने संयुक्त राष्ट्र में दो टूक कहा है कि मानवाधिकारों के नाम पर किसी देश पर राजनीतिक दबाव बनाना उचित नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि नई दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे युवाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जबकि कई लोगों ने दुर्व्यवहार की शिकायतें भी की हैं।विशेषज्ञों ने अधिकारियों से शांतिपूर्ण सभाओं पर व्यापक प्रतिबंध हटाने, कथित मनमानी हिरासत रोकने और इंटरनेट बंद करने तथा जैविक पहचान आधारित निगरानी के संभावित दुरुपयोग से बचने की अपील की है। उन्होंने कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की।
प्रदर्शनों के पीछे एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूचियों में संशोधन है। प्रदर्शनकारी समूहों का दावा है कि मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। प्रदर्शनकारी इस मामले में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।हालांकि, निर्वाचन आयोग का कहना है कि सूची से दोहराए गए, मृत, स्थानांतरित और अन्य अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। आयोग के अनुसार, गलती से नाम हटने पर संबंधित व्यक्ति उसे बहाल कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपील कर सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से विदेश मंत्रालय की उप सचिव बरखा तामरकर ने कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं के साथ उसका संवाद जारी है, लेकिन यह निष्पक्षता, पारदर्शिता, सहयोग और परामर्श के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। भारत ने अपुष्ट आरोपों और अधूरे आंकड़ों के आधार पर देश की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने के प्रयासों का भी विरोध किया।