Edited By Niyati Bhandari,Updated: 13 Oct, 2026 02:53 PM

October Panchak 2026: अक्टूबर में 21 से 25 अक्टूबर तक रहेगा पंचक का साया। जानें, पंचक का सटीक समय, प्रारंभ व समापन की तिथि और इस दौरान वर्जित 5 प्रमुख काम।
October Panchak 2026: हिंदू धर्म में पंचक की अवधि को विशेष रूप से अशुभ माना जाता है, जो सामान्यतः हर महीने 5 दिनों के लिए आती है। हालांकि, इस दौरान पूजा-पाठ करने या मंत्रों के जाप पर किसी भी प्रकार की पाबंदी नहीं होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक किस वार (दिन) से प्रारंभ हो रहा है, इसका इसके प्रभाव पर गहरा असर पड़ता है। अक्टूबर 2026 में लगने वाला पंचक पूरे 5 दिनों का न होकर 4 दिन और 12 घंटे की अवधि का रहेगा।

अक्टूबर 2026 पंचक की सटीक तिथि और समय
अक्टूबर 2026 में पंचक काल 21 अक्टूबर 2026, बुधवार को सुबह 06:59 बजे से शुरू होगा। इसका समापन 25 अक्टूबर 2026, रविवार को शाम 07:21 बजे होगा। इस प्रकार अक्टूबर माह में पंचक की कुल अवधि 4 दिन 12 घंटे रहने वाली है।
बुधवार से शुरू होने के कारण माना जा रहा है 'दोषमुक्त'
शास्त्रों के अनुसार, यह पंचक बुधवार के दिन से शुरू हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में बुधवार और गुरुवार से शुरू होने वाले पंचक को दोषमुक्त, सौम्य या सामान्य पंचक कहा जाता है। इस अवधि में अन्य पंचकों की तुलना में विशेष पाबंदियां या अशुभ प्रभाव नहीं माने जाते हैं तथा सामान्य रूप से शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

पंचक के दौरान भूलकर भी न करें ये 5 कार्य
पंचक काल के दौरान ज्योतिष शास्त्र में कुछ विशिष्ट कार्यों को पूरी तरह से वर्जित माना गया है:
दक्षिण दिशा में यात्रा: दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, इसलिए पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से दुर्घटना या कष्ट का खतरा रहता है।
लकड़ी एवं ईंधन का संग्रह: पंचक में घर में लकड़ी, घास या किसी भी प्रकार के ज्वलनशील ईंधन को इकट्ठा नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे अग्नि का भय बना रहता है।
चारपाई और पलंग बनवाना: इस दौरान नई खाट बुनना, पलंग बनवाना या लकड़ी का नया फर्नीचर खरीदना व बनवाना अशुभ माना गया है।
घर की छत डलवाना: नया मकान बन रहा हो या पुराना, पंचक के समय घर की छत नहीं डलवानी चाहिए। मान्यता है कि इससे घर में कलह और आर्थिक तंगी आती है।
मांगलिक कार्य टालना: विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार तथा नए आभूषण या वस्त्र खरीदना जैसे मांगलिक कार्य इस दौरान टाल दिए जाते हैं।
अंतिम संस्कार से जुड़ा विशेष नियम
यदि पंचक की अवधि में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो केवल सामान्य रीति से शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता। किसी भी अनिष्ट से रक्षा के लिए विद्वान पंडित की सलाह से आटे या कुश के पांच प्रतीकात्मक पुतले बनाकर विशेष शांति-विधान के साथ दाह संस्कार किया जाता है।
