अप्रत्याशित हिट ‘हनुमान अंश’ के बाद स्टूडियोज का गुरुओं पर बढ़ा भरोसा

Edited By Updated: 30 Sep, 2026 06:13 AM

studios  faith in gurus grows after the unexpected hit  hanuman ansh

धार्मिक गुरुओं और आध्यात्मिक हस्तियों पर कई स्टूडियो फिल्मों की शुरुआत कर चुके हैं और कई अन्य फिल्में रिलीज करने की तैयारी में हैं, क्योंकि भक्ति ड्रामा फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर अप्रत्याशित सफलता हासिल की है, जिसकी अकेले घरेलू कमाई ही 290...

धार्मिक गुरुओं और आध्यात्मिक हस्तियों पर कई स्टूडियो फिल्मों की शुरुआत कर चुके हैं और कई अन्य फिल्में रिलीज करने की तैयारी में हैं, क्योंकि भक्ति ड्रामा फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर अप्रत्याशित सफलता हासिल की है, जिसकी अकेले घरेलू कमाई ही 290 करोड़ रुपए के पार पहुंच गई है। जहां अबंडेंशिया एंटरटेनमैंट ने ‘हारे का सहारा, बाबा खाटू श्याम हमारा’ की घोषणा की है, जो श्री खाटू श्याम जी के भक्तों की आस्था और कथा से प्रेरित एक फीचर फिल्म है, वहीं ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की विरासत पर ‘रामबोला’ बनाएंगे। दो अन्य शीर्षक, ‘तेरा साईं’ (जिसमें शिरडी साईं बाबा के रूप में संजय मिश्रा हैं) और ‘व्हाइट’ (जिसमें श्री श्री रवि शंकर की भूमिका में विक्रांत मैसी हैं), भी आने वाली हैं।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘स्लीपर हिट’ (धीमी शुरुआत के बाद बड़ी हिट बनी फिल्म) ने बॉक्स ऑफिस का एक भरोसेमंद फॉर्मूला सामने ला दिया है। इससे यह साबित होता है कि छोटे बजट की पौराणिक या भक्ति फिल्में रामायण जैसी बड़े बजट की ‘टेंटपोल’ फिल्मों जितने भारी बजट या स्टार कास्ट के बिना भी सफल हो सकती हैं। ये फिल्में ऐसे व्यक्तित्वों पर आधारित हैं, जिनके आज भी जीवित अनुयायी मौजूद हैं और दर्शक बस भावनात्मक जुड़ाव के साथ अपनी उसी भक्ति को दोबारा महसूस कर रहे होते हैं।

अबंडेंशिया एंटरटेनमैंट के संस्थापक और सी.ई.ओ. विक्रम मल्होत्रा ने कहा, ‘‘आस्था-आधारित कहानियों का आकर्षण एक असाधारण लाभ के साथ शुरू होता है-एक तरह से, ये कहानियां दर्शकों के दिल में पहले से ही अपनी जगह बनाए होती हैं। यह कहानीकार को तुरंत एक भावनात्मक जुड़ाव बनाने का अवसर देता है। एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक वर्ग मौजूद है, जिसके दायरे में ये कहानियां काम करती हैं और यह एक ऐसा दर्शक वर्ग है, जिसे अब तक काफी हद तक अनदेखा किया गया है।’’

मल्होत्रा ने आगे कहा कि आस्था और भक्ति से जुड़ी कहानियों के लिए भारत का लक्षित दर्शक वर्ग संभवत: सिनेमा देखने वाले किसी भी अन्य वर्ग की तुलना में सबसे बड़ा है। इसमें महानगरों से लेकर छोटे शहर, नियमित सिनेमाघरों में जाने वाले दर्शक और ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो सामान्यत: बार-बार सिनेमा हॉल नहीं जाते और यह अक्सर परिवारों की कई पीढिय़ों को एक साथ जोड़ता है। मल्होत्रा ने कहा, लेकिन अनुयायियों की संख्या को बॉक्स ऑफिस की कमाई का पैमाना नहीं माना जा सकता। सिनेमा के बुनियादी नियम हर जगह एक जैसे हैं-आपको एक अच्छी कहानी चाहिए, जिसे समझदारी और भावनात्मक रूप से पेश किया गया हो।

‘रामायण’ जैसी पौराणिक भव्य गाथाओं और ‘हनुमान अंश’ जैसी भक्ति या आस्था-आधारित कहानियों के बीच बड़े अंतर हैं। एक पौराणिक फिल्म भव्य पैमाने के वादे के साथ आती है-दुनिया का निर्माण, एक्शन, बड़े सितारे, तकनीक और एक उन्नत विजुअल अनुभव। वहीं किसी संत, भक्त या परंपरा पर आधारित फिल्म भव्यता की बजाय व्यक्तिगत और आत्मीय जुड़ाव की ताकत पर खड़ी होती है। इसके बावजूद, दो वास्तविक चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

पहली, अति-संतुष्टि, क्योंकि एक ही तरह की कई फिल्में एक साथ आने से दर्शकों को चुनाव करने पर मजबूर होना पड़ेगा, इसलिए कहानी कहने का तरीका अलग होना चाहिए, और दूसरी, प्रामाणिकता, क्योंकि भक्त आमतौर पर गलतियों को कम ही क्षमा करते हैं। सिनेनाऊ के सी.एम.डी. रोहित डालमिया ने कहा, ‘‘हनुमान अंश को एक अपवाद माना जाना चाहिए, न कि एक वित्तीय टैम्पलेट।’’ उन्होंने कहा कि व्याख्याओं (इंटरप्रिटेशन), चमत्कारों आदि को लेकर भी काफी संवेदनशीलता रहती है।-लता झा 

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!