इक्रा ने कमजोर मानसून के कारण कृषि वृद्धि दर का अनुमान घटाया

Edited By Updated: 02 Oct, 2026 05:50 PM

icra lowers agriculture growth forecast due to weak monsoon

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्र की वृद्धि दर के अनुमान को 1.3 प्रतिशत से घटाकर लगभग एक प्रतिशत कर दिया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश इस साल दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के मुकाबले 87 प्रतिशत पर...

नई दिल्लीः रेटिंग एजेंसी इक्रा ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्र की वृद्धि दर के अनुमान को 1.3 प्रतिशत से घटाकर लगभग एक प्रतिशत कर दिया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश इस साल दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के मुकाबले 87 प्रतिशत पर आने को देखते हुए वृद्धि दर घटाई गई है। यह औसत 2015 के बाद सबसे कम है। 

इक्रा ने मानसून पर अपनी समीक्षा रिपोर्ट में कहा कि कम और असमान बारिश ने खरीफ बुवाई को पहले ही प्रभावित किया है। यह सितंबर के अंत तक पिछले वर्ष के स्तर से 1.2 प्रतिशत कम रही। जलाशयों के विशेष रूप से दक्षिणी और कुछ उत्तरी राज्यों में घटे जलस्तर ने आगामी रबी सत्र को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एजेंसी ने कहा, ''फसल उत्पादन और कृषि आय पर कमजोर मानसून के संभावित असर को लेकर इक्रा सतर्क बनी हुई है।'' इसके साथ ही चेतावनी दी गई कि कृषि आय में कमी वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ग्रामीण मांग को सुस्त कर सकती है और खाद्य मुद्रास्फीति के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। 

जून-सितंबर के दौरान 'अल नीनो' के प्रभाव के कारण बारिश दीर्घकालीन औसत के मुकाबले 87 प्रतिशत रही। बारिश का वितरण भी अत्यधिक असमान रहा। पूर्व और पूर्वोत्तर क्षेत्र में एलपीए के मुकाबले 74 प्रतिशत तथा दक्षिणी राज्यों में 76 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। दूसरी ओर उत्तर-पश्चिम भारत में 94 प्रतिशत बारिश हुई। मध्य भारत एकमात्र प्रमुख क्षेत्र रहा जहां सामान्य बारिश दर्ज की गई, जो एलपीए का 97 प्रतिशत है। सितंबर के अंत तक खरीफ का रकबा 11.07 करोड़ हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 1.2 प्रतिशत कम है। चावल के रकबे में 3.6 प्रतिशत और कपास के रकबे में एक प्रतिशत की गिरावट आई, जिसकी कुछ हद तक भरपाई दलहन और मोटे अनाज के रकबे में हुई वृद्धि से हुई।  

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