इराक ने भारतीय रिफाइनरों को तेल पर छूट देने की पेशकश की

Edited By Updated: 10 Mar, 2023 01:06 PM

iraq offers oil waiver to indian refiners

भारत में करीब एक तिहाई तेल का आयात रूस से हो रहा है। ऐसे में इराक ने भारत के तेल आयात में अपनी घटती हिस्सेदारी को थामने के लिए भारतीय रिफाइनरों को छूट देने की पेशकश की है। मामले से वाकिफ लोगों ने बताया कि इराक भारतीयों से खुली बात करना चाहता है कि...

बिजनेस डेस्कः भारत में करीब एक तिहाई तेल का आयात रूस से हो रहा है। ऐसे में इराक ने भारत के तेल आयात में अपनी घटती हिस्सेदारी को थामने के लिए भारतीय रिफाइनरों को छूट देने की पेशकश की है। मामले से वाकिफ लोगों ने बताया कि इराक भारतीयों से खुली बात करना चाहता है कि कितनी छूट देने पर वे उससे पहले जितना तेल लेने लगेंगे।

उद्योग के वरिष्ठ अ​धिकारियों ने बताया कि इस समय भारत को सबसे अधिक तेल आपूर्त करने वाला इराक भारत के रिफाइनरों से पूछना चाहता है कि वे कितनी छूट चाहते हैं। भारत रूस से कच्चे तेल का आयात लगातार बढ़ा रहा है, जिससे पश्चिम एशिया से तेल आयात की मात्रा घटी है। इससे इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से तेल की आवक प्रभावित हुई है।

एक सरकारी तेल रिफाइनिंग कंपनी के एक वरिष्ठ अ​धिकारी ने कहा, ‘इसीलिए इराक ने भारतीय रिफाइनरों से कहा है कि वह कच्चे तेल की कीमत और कम करने को तैयार है। उसने तेल की आपूर्ति बेहतर करने के लिए बातचीत की इच्छा जताई है।’ उन्होंने बताया कि सरकार भी यह जानती है।

अ​धिकारियों ने कहा कि इस मुद्दे पर द्विपक्षीय बातचीत के आसार नहीं है मगर इराक का यह कदम अप्रत्याशित नहीं है। एक अ​धिकारी ने कहा, ‘जब पश्चिम के साथ रूस के संबंध लगातार बिगड़ रहे हैं और कच्चे तेल में भारी छूट दी ही जा रही तो इराक का सक्रिय होना स्वाभाविक है ताकि भारत के कच्चे तेल आयात में उसकी हिस्सेदारी और कम न हो जाए।’

पिछले साल जून में इराक ने रूसी तेल के मुकाबले 9 डॉलर प्रति बैरल की कम औसत कीमत पर कच्चे तेल की आपूर्ति कर रूस को पछाड़ दिया था। इसी कारण कीमत के प्रति बेहद संवेदनशील रहने वाले इस बाजार में इराक का बोलबाला हो गया था।

यह सिलसिला तब तक चलता गया, जब तक 5 दिसंबर, 2022 को जी7 देशों ने रूस के कच्चे तेल के लिए 60 डॉलर प्रति बैरल की न्यूनतम कीमत तय नहीं कर दी। इसके साथ ही यूरोपीय संघ के देशों ने समुद्र के रास्ते रूस से कच्चे तेल की आमद पर भी प्रतिबंध लगा दिया।

एक वरिष्ठ अ​धिकारी ने कहा, ‘अलग-थलग किए जाने पर रूस ने ज्यादा प्रतिस्पर्द्धी कीमत कर दी ताकि भारत और चीन जैसे देशों को कच्चे तेल की लगातार आपूर्ति की जाती रहे। इससे यूरोक को तेल आपूर्ति में हुई कमी की भरपाई इन देशों से हो रही थी। फरवरी तक यही चलता रहा।’ एक अन्य अ​धिकारी ने कहा, ‘इरका से तेल का आयात हमारी खरीद का प्रमुख हिस्सा रहा है मगर वैश्विक जटिलताएं और इराक के भीतर अस्थिरता देखते हुए भारत के पास वैकल्पिक इंतजाम होना ही चाहिए।’

हाल के महीनों में रूस से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा है। वह लगातार पांचवें महीने भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता रहा। कमोडिटी आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली फर्म वोर्टेक्सा के अनुसार फरवरी में भारत ने रूस से रोजाना 16 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया, जो सर्वकालिक उच्च स्तर है। जनवरी में यह आंकड़ा 14 लाख बैरल रोजाना और दिसंबर में 10 लाख बैरल रोजाना रहा था। इस बीच इराक से तेल आयात घटकर फरवरी में 9,39,921 बैरल रोजाना रह गया। हालांकि जनवरी में वह बढ़कर सात महीने की ऊंचाई 9,83,000 बैरल रोजाना पर पहुंच गया था।

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