GST काउंसिल 57वीं बैठक: कारोबारियों को बड़ी राहत, गिरफ्तारी के नियमों में बदलाव पर फैसला

Edited By Updated: 08 Oct, 2026 05:48 PM

major relief for businesses decision taken on changes to arrest rules

GST काउंसिल की 57वीं बैठक में सरकार ने GST व्यवस्था को आसान बनाने और टैक्सपेयर्स को राहत देने की दिशा में कई अहम फैसले किए हैं। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने का फैसला किया गया है। साथ ही, आपराधिक मुकदमा...

नई दिल्ली: जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। बैठक में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए GST सिस्टम को आसान बनाने, रिफंड प्रक्रिया तेज करने और टैक्स व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और अनुमानित बनाने के लिए कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई।

इसके अलावा डिलीवरी सर्विस, रिट्रेडेड ट्रैक्टर टायर और छोटे टैक्स मामलों से जुड़े भी अहम फैसले लिए गए हैं। इन बदलावों से एफएमसीजी, फार्मा, टेलीकॉम, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिलीवरी और कॉरपोरेट सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है।

गिरफ्तारी अधिकार खत्म

काउंसिल ने टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म कर दी है और मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दी है। रिफंड प्रक्रिया को भी तेज किया गया है। अब रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। 

वित्त मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि जीएसटी दरों की समीक्षा के लिए हर साल काउंसिल की एक बैठक अलग से हुआ करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने नोटिस और कार्यवाही के लिए समान मानक की सिफारिश की है।

कर्मचारी बीमा पर GST का ITC मिलेगा, कंपनियों को बड़ी राहत

वित्त मंत्री ने कहा कि कर्मचारियों के लिए खरीदे गए जीवन और स्वास्थ्य बीमा कवर पर चुकाए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) अब नियोक्ताओं को मिल सकेगा। मौजूदा व्यवस्था के तहत अगर कोई व्यक्ति खुद या अपने परिवार के लिए जीवन या स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदता है, तो उसे GST से छूट मिलती है। वहीं, कंपनियों की ओर से कर्मचारियों के लिए खरीदे गए बीमा कवर पर अब तक 18% GST लागू था और कंपनियां इस भुगतान पर ITC का दावा नहीं कर पाती थीं।

नए फैसले से कर्मचारियों को बीमा सुविधा देने वाली कंपनियों की लागत कम होने की उम्मीद है। इससे कंपनियों के लिए कर्मचारियों को हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस कवर उपलब्ध कराना भी अधिक आकर्षक हो सकता है।

डिलीवरी सर्विस पर GST 18% से घटकर 5%

डिलीवरी सेक्टर के लिए भी राहत की खबर है। सूत्रों के मुताबिक, अनरजिस्टर्ड डिलीवरी सर्विस देने वाले राइडर्स की सेवाओं पर GST 18% से घटाकर 5% करने को मंजूरी दी गई है। इससे छोटे डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स से जुड़े डिलीवरी कारोबार पर टैक्स बोझ कम हो सकता है।

FMCG और फार्मा कंपनियों को बड़ा फायदा

जीएसटी काउंसिल ने फ्री सैंपल और कानून के तहत अनिवार्य रूप से नष्ट किए जाने वाले सामान पर भी ITC से जुड़े बदलाव को मंजूरी दी है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनियों को ऐसे फ्री सैंपल, जिन पर जीएसटी चुका गया है और ऐसे सामान जिन्हें एक्सपायर होने के बाद कानून के मुताबिक नष्ट करना जरूरी है, उन पर ITC का लाभ मिलेगा।

इसका सबसे ज्यादा फायदा एफएमसीजी और फार्मास्युटिकल कंपनियों को हो सकता है। फार्मा कंपनियों के लिए ये बदलाव खास महत्व रखता है, क्योंकि दवाओं के सैंपल और एक्सपायर हो चुकी दवाओं को नष्ट करना कारोबार की प्रक्रिया का हिस्सा है।

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