Edited By jyoti choudhary,Updated: 22 Sep, 2026 11:43 AM

प्याज की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक साल की तुलना में इसकी खुदरा कीमतें करीब दोगुनी से अधिक हो गई हैं। उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 21 सितंबर 2026 को प्याज की औसत खुदरा कीमत 54.23 रुपए प्रति
नई दिल्लीः प्याज की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक साल की तुलना में इसकी खुदरा कीमतें करीब दोगुनी से अधिक हो गई हैं। उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 21 सितंबर 2026 को प्याज की औसत खुदरा कीमत 54.23 रुपए प्रति किलो रही, जबकि करीब एक महीने पहले यह 40.79 रुपए प्रति किलो थी।
थोक बाजार में भी कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला है। 21 सितंबर को प्याज का औसत थोक भाव 4,615.98 रुपए प्रति क्विंटल रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 3,299.85 रुपए प्रति क्विंटल था यानी सालाना आधार पर थोक कीमत में करीब 135 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कई शहरों में 50 रुपए के पार पहुंचा भाव
प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश के अलग-अलग शहरों में भी दिखाई दे रहा है। दिल्ली में एक साल पहले प्याज करीब 32 रुपए किलो बिक रही थी, जो अब बढ़कर लगभग 53 रुपए किलो पहुंच गई है।
मुंबई में कीमत 30 रुपए से बढ़कर करीब 58 रुपए और चेन्नई में 30 रुपए से बढ़कर 60 रुपए किलो तक पहुंच गई। वहीं, रांची में प्याज का भाव 25 रुपए से बढ़कर करीब 57 रुपए किलो हो गया है।
क्यों महंगा हुआ प्याज
प्याज के महंगे होने के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज की फसल को मार्च में हुई बेमौसम बारिश से नुकसान पहुंचा था। इसके अलावा केंद्रीय एजेंसियों के पास रखे स्टॉक का भी एक हिस्सा खराब होने की बात सामने आई है।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की मांग कमजोर बनी हुई है। बांग्लादेश में उत्पादन बढ़ने के कारण दूसरे बाजारों में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। इन परिस्थितियों के बावजूद फिलहाल प्याज की कीमतों में बहुत बड़ी तेजी की संभावना कम बताई जा रही है।
जल्द घट सकते हैं प्याज के दाम
पिछले एक हफ्ते से प्याज के भाव लगभग स्थिर बने हुए हैं। फिलहाल अच्छी गुणवत्ता वाली प्याज की मांग मुख्य रूप से बीज कंपनियों की तरफ से बताई जा रही है। बाजार से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, इन कंपनियों की खरीद पूरी होने के बाद प्याज के भाव में 5 से 10 रुपए प्रति किलो तक की गिरावट आ सकती है।
क्यों कुछ महीनों में बढ़ जाते हैं प्याज के दाम?
प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव का संबंध इसके फसल चक्र और मंडियों में होने वाली आवक से है। रबी सीजन की प्याज आमतौर पर मार्च-अप्रैल से बाजार में पहुंचती है और इसका बड़ा हिस्सा स्टोर भी किया जाता है। इसके बाद खरीफ सीजन की नई फसल आने तक बाजार की आपूर्ति काफी हद तक पुराने स्टॉक पर निर्भर रहती है।
जैसे-जैसे रबी प्याज का स्टॉक खपत के कारण कम होता है, कुछ महीनों में मंडियों में आवक घट सकती है। खासकर अगस्त से जनवरी के बीच अगर उपलब्धता और मांग के बीच अंतर बढ़ता है, तो कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है।