PGI में ट्रांस कैथेटर तकनीक से दो हार्ट मरीजों के बदले वाल्व

Edited By Priyanka rana,Updated: 07 Aug, 2019 11:11 AM

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पी.जी.आई. चंडीगढ़ ने मैडिकल साइंस के क्षेत्र में एक और नई उपलब्धि हासिल की है। पी.जी.आई. में 2 दिल के मरीजों का बिना किसी चीर-फाड़ के कैथेटर तकनीक से सफल आप्रेशन किया गया है।

चंडीगढ़(पाल) : पी.जी.आई. चंडीगढ़ ने मैडिकल साइंस के क्षेत्र में एक और नई उपलब्धि हासिल की है। पी.जी.आई. में 2 दिल के मरीजों का बिना किसी चीर-फाड़ के कैथेटर तकनीक से सफल आप्रेशन किया गया है। 

इनमें से एक मरीज 72 और दूसरे की उम्र 75 साल थी। इस सर्जरी को पी.जी.आई. एडवांस कॉर्डियक सैंटर के एच.ओ.डी. प्रोफैसर यशपाल शर्मा के नेतृत्व में डॉ पराग बरवाड, डॉ. जी.डी पुरी और डॉ. श्याम ने दोनों हृदय रोगियों की ट्रांस कैथेटर तकनीक से सर्जरी की और सर्जरी के दूसरे दिन ही दोनों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। 

पहले कट लगाकर बदला जाता था :
इस सर्जरी को अंजाम देने वाले डॉ. पराग बरवाड़ ने बताया कि इस सर्जरी को हाई और इंटरमीडिएट रिस्क वाले बुजुर्ग मरीजों पर किया जाता जो छाती में होने वाली चीर-फाड़ से गुरेज करते हैं। पहले जब किसी मरीज का वाल्व बदला जाता था तो छाती में कट लगाकर नया वाल्व फिट किया जाता था। 

इस तकनीक के माध्यम से रोगी के जांघ में ‘फिमोरल अपरोच’ से कैथेटर डालकर उसके हार्ट में नया ‘माइवल’ नाम का वाल्व फिट किया जाता है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में ही मैरिल लाइफ साइंस द्वारा निर्मित अपने तरह के इस इनोवेटिव वाल्व से रोगी को किसी प्रकार के जोखिम का सामना नहीं करना पड़ता है और वह महज दो दिनों में ही चलना-फिरना शुरु कर देता है। 

देश में ही बने हार्ट वाल्व मरीजों के लिए साबित हो रहे कारगर :
डाक्टरी टीम मानती है कि देश में ही बने हार्ट वाल्व मरीजों के लिए कारगर और किफायती साबित हो रहे हैं। यह तकनीक विदेशों में या फिर भारत में निजी क्षेत्र के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में ही अपनाई जाती थी लेकिन अब पी.जी.आई. में इसे सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। इस सर्जरी को अंजाम देने के लिए गठित टीम में कार्डियोलोजिस्ट, कार्डियक सर्जन, रेडियोलोजिस्ट, ऐनिसथिसियोलोजिस्ट आदि विशेषज्ञों को होना आवश्यक होता है।   

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